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Danger of arson increasing in Guptkashi: केदारनाथ यात्रा का प्रमुख पड़ाव गुप्तकाशी न केवल आध्यात्मिक महत्व का केंद्र है, बल्कि पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा व्यवसायिक हब भी है। हर रोज आसपास के गांवों से 60 से अधिक छोटे वाहन यहां पहुंचते हैं, जिसके साथ सैकड़ों लोग खरीदारी के लिए बाजार में उमड़ते हैं। घनी दुकानों और भीड़भाड़ वाला ये इलाका यात्रा सीजन में चहल-पहल से भरा रहता है। मगर इसी हलचल के बीच एक खतरा बार-बार सिर उठाता है- आगजनी का खतरा। इसे काबू करना क्षेत्र के लिए मुश्किल बना हुआ है।

गुप्तकाशी से गौरीकुंड के बीच का इलाका फाटा, रामपुर, सोनप्रयाग और गौरीकुंड भी इसी समस्या से जूझ रहा है। बीते रविवार को सोनप्रयाग में एक चार मंजिला होटल में आग लगने की घटना ने इस खतरे को फिर से उजागर किया। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की भरपूर कोशिश की, मगर पानी की अपर्याप्त आपूर्ति ने उनके हाथ बांध दिए।

फायर सर्विस को मौके पर पहुंचने में तीन घंटे से अधिक वक्त लग गया। तब तक होटल का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो चुका था। जिले का एकमात्र फायर सर्विस स्टेशन रतूड़ा में है, जो सोनप्रयाग से 83 किलोमीटर दूर स्थित है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि गुप्तकाशी में फायर सर्विस स्टेशन की मंजूरी मिल चुकी है, मगर जमीन उपलब्ध न होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा। यह सुनकर सवाल उठता है कि क्या एक महत्वपूर्ण यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के लिए इतनी ढिलाई बरती जा सकती है? जहां हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, वहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है। यदि प्रशासन ऐसे ही सुस्त रहा तो इसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ सकता है 

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