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Up kiran,Digital Desk : कल तक जो राष्ट्रपति ईरान पर बम बरसाने की तारीखें गिन रहे थे, आज अचानक उनके सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में ईरान के साथ जारी सीजफायर (संघर्षविराम) को विस्तार देने का फैसला किया है। दिलचस्प बात यह है कि इस महायुद्ध को टालने के पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की 'पर्सनल रिक्वेस्ट' बताई जा रही है। हालांकि, तेहरान इस नरमी को शांति का संकेत नहीं बल्कि एक सोची-समझी 'साजिश' मान रहा है।

शहबाज और मुनीर का वो फोन कॉल जिसने बदल दिया ट्रंप का मिजाज

सूत्रों के मुताबिक, बुधवार सुबह तक ट्रंप ईरान के साथ किसी भी तरह की रियायत देने को तैयार नहीं थे। उन्होंने एक प्रमुख समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में साफ कहा था कि "वक्त खत्म हो रहा है।" लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद 'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप के तेवर ढीले पड़ गए। ट्रंप ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर ने उनसे निजी तौर पर अनुरोध किया था। पाकिस्तान की दलील थी कि तेहरान को एक 'संयुक्त प्रस्ताव' लाने का आखिरी मौका दिया जाए, जिसे ट्रंप ने स्वीकार कर लिया।

पाकिस्तान बनेगा शांति का केंद्र, शहबाज शरीफ ने जताया आभार

ट्रंप की इस घोषणा के तुरंत बाद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने उनका शुक्रिया अदा किया। शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति का पक्षधर है और इस समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी ईमानदार कोशिशें जारी रखेगा। बड़ी खबर यह भी है कि ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की ऐतिहासिक शांति वार्ता पाकिस्तान में ही आयोजित होगी। हालांकि, सुरक्षा कारणों से फिलहाल इसकी तारीखों का खुलासा नहीं किया गया है।

ईरान का अविश्वास: 'सीजफायर के नाम पर अचानक हमले की तैयारी'

इधर ट्रंप ने सीजफायर बढ़ाया, उधर ईरान में खलबली मच गई। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ के करीबियों ने इसे अमेरिका की एक "चाल" करार दिया है। तेहरान के गलियारों में चर्चा है कि अमेरिका युद्धविराम का बहाना बनाकर ईरान को मानसिक रूप से ढीला करना चाहता है, ताकि वह समय लेकर अचानक और घातक हमला कर सके। ईरान के कट्टरपंथी धड़े ने तो अब अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई की मांग भी शुरू कर दी है।

युद्ध टला नहीं है, सिर्फ थमा है!

भले ही पाकिस्तान की मध्यस्थता से कुछ वक्त मिल गया हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी और सेना 'अलर्ट' पर है। ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि अगर ईरान ने जल्द ही कोई ठोस प्रस्ताव मेज पर नहीं रखा, तो यह सीजफायर केवल एक "छोटे ब्रेक" की तरह साबित होगा जिसके बाद गनफायर की आवाज और तेज हो सकती है।