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Up kiran,Digital Desk : अमेरिका में टैरिफ को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भारत को लेकर एक बड़ा दावा किया है। ग्राहम के मुताबिक, भारत के अमेरिकी राजदूत विनय कुमार क्वात्रा ने उनसे कहा है कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद धीरे-धीरे कम कर रहा है और इसी वजह से वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारत पर लगाए गए टैरिफ में राहत की बात करें।

ग्राहम ने यह बयान उस वक्त दिया, जब वह रविवार को एयर फोर्स वन में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मौजूद थे। उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इसी दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि जो देश रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं, उन पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। ट्रंप का कहना था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए पुतिन के खरीदारों पर दबाव बनाना जरूरी हो गया है।

सीनेटर ग्राहम ने बताया कि करीब एक महीने पहले वह भारतीय राजदूत के आवास पर गए थे, जहां उन्होंने रूस से तेल खरीद को लेकर सवाल किया था। ग्राहम के अनुसार, इस पर राजदूत विनय क्वात्रा ने उनसे कहा था कि वे राष्ट्रपति ट्रंप से टैरिफ में ढील देने की बात करें। ग्राहम का दावा है कि ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने के बाद ही भारत ने रूसी तेल की खरीद में कटौती शुरू की है।

हालांकि, ग्राहम के इन बयानों पर भारत सरकार या भारतीय अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पिछले महीने वॉशिंगटन स्थित इंडिया हाउस में भारतीय राजदूत ने ग्राहम समेत कई अमेरिकी सीनेटरों की मेजबानी की थी, जहां ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा हुई थी।

इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि अमेरिका भारत द्वारा रूसी तेल खरीदे जाने से खुश नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अमेरिका बहुत तेजी से टैरिफ बढ़ा सकता है, जो भारत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जिसमें रूसी तेल से जुड़ा 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है। हालांकि, ट्रंप ने मोदी को “बहुत अच्छा इंसान” बताते हुए यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका को संतुष्ट करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं।

रूसी तेल आयात के आंकड़े क्या संकेत देते हैं

डेटा एनालिटिक्स कंपनी केपलर के अनुसार, भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल का आयात लगातार घट रहा है। दिसंबर में यह करीब 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है, जबकि नवंबर में यह आंकड़ा 1.84 मिलियन बैरल प्रतिदिन था। यह दिसंबर 2022 के बाद सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। यूक्रेन युद्ध से पहले 2021 तक भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी सिर्फ 0.2 प्रतिशत थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। लेकिन हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अब रूस की हिस्सेदारी घटकर एक चौथाई से भी कम रह गई है।