Up kiran,Digital Desk : फिल्म ‘धुरंधर 2’ की अपार सफलता के बाद देश में जासूसों और मिलिट्री ऑपरेशन्स को लेकर जिज्ञासा चरम पर है। इस फिल्म में मिलिट्री कंसल्टेंट की भूमिका निभाने वाले रिटायर्ड कर्नल भूपिंदर शाही ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में महिला जासूसों (Female Spies) और युद्ध के मैदान में महिला सैनिकों की सुरक्षा को लेकर कई रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर वे लीडर होते, तो कभी किसी महिला को ऐसे मिशन पर नहीं भेजते जहां उनके पकड़े जाने का खतरा हो।
हनी ट्रैप और जासूसी: पाकिस्तानी अफसरों से निकलवाया था डेटा
श्लोका के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कर्नल शाही ने भारतीय मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की एक महिला अधिकारी के अदम्य साहस का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस लेडी ऑफिसर ने हनी ट्रैप और अपनी बुद्धिमत्ता के जरिए पाकिस्तानी अफसरों के सिस्टम और लैपटॉप में सेंध लगाई थी। वहां से वह बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण डेटा निकाल कर लाई थीं। शाही ने माना कि महिलाएं बेहद शार्प और इंटेलिजेंट होती हैं और वे ड्रोन से लेकर मिसाइल तक हर आधुनिक हथियार चलाने में सक्षम हैं, लेकिन युद्ध के मैदान की हकीकत इससे कहीं अधिक क्रूर है।
दुश्मन देश में 'नर्क' से बदतर हो सकता है बर्ताव
जब उनसे पूछा गया कि अगर कोई महिला जासूस या सैनिक दुश्मन देश (विशेषकर कट्टरपंथी सोच वाले देशों) में पकड़ी जाती है, तो उनके साथ कैसा बर्ताव होता है? इस पर कर्नल शाही भावुक और गंभीर हो गए। उन्होंने कहा, "यह बहुत घृणित हो सकता है। वे आपको निर्वस्त्र करेंगे, बुरी तरह टॉर्चर करेंगे और उन टॉर्चर के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालेंगे ताकि आपके देश का मनोबल तोड़ा जा सके।" उन्होंने हालिया कुवैत प्लेन क्रैश और लेडी पायलट का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वह पैराशूट से दुश्मन की सीमा में गिरतीं, तो अंजाम सोचना भी डरावना है।
'मुस्लिम देशों की मानसिकता और महिला सैनिक'
कर्नल भूपिंदर शाही ने कट्टरपंथी मानसिकता पर प्रहार करते हुए कहा कि कुछ देशों के लोगों को यह कभी बर्दाश्त नहीं होता कि एक महिला उन पर हमला करने की कोशिश कर रही है। पकड़े जाने पर वे महिला को 'सबक सिखाने' के नाम पर अमानवीय कृत्य करते हैं। शाही ने कहा, "दुश्मन के लिए नैतिकता कुछ नहीं होती। वे महिलाओं के साथ वो सब करेंगे जिसे शब्दों में बयान करना भी मुश्किल है। हमने अपने पुरुष फौजियों के साथ होते टॉर्चर को देखा है, महिलाओं के मामले में यह और भी भयावह हो सकता है।"
युद्ध में महिलाओं की भागीदारी पर निजी राय
कर्नल शाही ने स्पष्ट किया कि हालांकि भारतीय सेना और नौसेना में महिलाएं बेहतरीन काम कर रही हैं, लेकिन अभी उन्हें सीधे फ्रंटलाइन युद्ध (Direct Combat) में भेजने से पहले सुरक्षा और परिणामों पर गहराई से सोचना होगा। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय देते हुए कहा कि वे महिलाओं को ऐसी स्थिति में नहीं डालना चाहेंगे जहां वे 'प्रिजनर ऑफ वॉर' (POW) बन जाएं।




