img

Up kiran,Digital Desk : ज़रा अपनी आंखें बंद कीजिए और सोचिए... सरसों का खेत, भागती हुई सिमरन, और अपनी बाहें फैलाए खड़ा हुआ राज... इस एक सीन ने न जाने कितनी पीढ़ियों को प्यार करना सिखाया है। फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' (DDLJ) सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक एहसास है, एक विरासत है।

इस अक्टूबर, इस ऐतिहासिक फिल्म ने अपने 30 साल पूरे कर लिए हैं, और इस मौके पर एक ऐसा कमाल हुआ है जो आज तक किसी भी भारतीय फिल्म के साथ नहीं हुआ।

लंदन में अब 'राज-सिमरन' हुए अमर!

'पलट... पलट...' कहने वाले राज और अपनी 'बाऊजी' से डरने वाली सिमरन को वो सम्मान मिला है, जिसके बाद हर भारतीय सिनेमा प्रेमी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।
इतिहास में पहली बार, किसी भारतीय फिल्म के किरदारों की मूर्ति लंदन के मशहूर लीसेस्टर स्क्वायर (Leicester Square) में लगाई गई है। जी हाँ, उसी लंदन में, जहां 'बड़े-बड़े देशों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं'।

सोचिए, अब इस मशहूर चौराहे पर हैरी पॉटर और बैटमैन जैसी मशहूर मूर्तियों के पास हमारे अपने राज और सिमरन की कांसे (bronze) की मूर्ति भी खड़ी है।

जब असली 'राज-सिमरन' पहुंचे अपनी मूर्तियों के पास

इस ऐतिहासिक पल को और भी खास बनाने के लिए, खुद 'किंग खान' शाहरुख और 'सिमरन' यानी काजोल भी लंदन पहुंचे। इस मौके की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं।

तस्वीरों में काजोल नीले रंग की खूबसूरत साड़ी में नजर आ रही हैं, जबकि शाहरुख खान अपने क्लासिक काले सूट में हमेशा की तरह डैशिंग लग रहे हैं। दोनों ने अपनी मूर्तियों के सामने उसी मशहूर 'DDLJ पोज़' में खड़े होकर इस लम्हे को और भी यादगार बना दिया।

शाहरुख खान का दिल छू लेने वाला संदेश

इस मौके पर शाहरुख खान भी अपने जज़्बात को रोक नहीं पाए। उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर अपनी मशहूर लाइन के साथ लिखा:
"बड़े बड़े देशों में, ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं, सेनोरिटा! 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' के 30 साल पूरे होने का जश्न मनाते हुए आज लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में राज और सिमरन की कांस्य प्रतिमा का अनावरण करते हुए बहुत खुश हूँ।  कि DDLJ पहली भारतीय फिल्म है जिसे यह सम्मान मिला है... अगर आप लंदन में हों तो राज और सिमरन से ज़रूर मिलें..."

यह सिर्फ एक फिल्म की कामयाबी नहीं है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा की विश्व पटल पर एक बड़ी जीत है। यह इस बात का सबूत है कि प्यार की कोई सरहद या ज़ुबान नहीं होती।