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UP Kiran,Digital Desk: आज के तकनीकी युग में, मोबाइल फोन बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन शिक्षा, मनोरंजन, और दोस्तों से जुड़ाव सभी कुछ स्क्रीन के माध्यम से हो रहा है। लेकिन जब बच्चे मोबाइल न मिलने पर चिड़चिड़े या आक्रामक हो जाते हैं, तो यह केवल एक अस्थायी मूड स्विंग नहीं हो सकता। यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

क्या है गेमिंग डिसऑर्डर?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने "गेमिंग डिसऑर्डर" को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर समस्या के रूप में स्वीकार किया है। इसका मतलब है कि जब बच्चों का गेम खेलने का व्यवहार उनकी पढ़ाई, सामाजिक जीवन और मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यह बच्चों के मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकता है और उनके रोजमर्रा के जीवन में परेशानी उत्पन्न कर सकता है।

खतरे के संकेत क्या हैं?

बच्चों में मोबाइल गेमिंग की लत के कुछ प्रमुख लक्षण हैं जिनसे पहचान की जा सकती है:

गुस्सा और चिड़चिड़ापन: बिना किसी वजह के बच्चे मोबाइल न मिलने पर गुस्से में आ जाते हैं।

शैक्षिक प्रदर्शन में गिरावट: पढ़ाई में ध्यान की कमी और पहले के मुकाबले कम अंक आना।

परिवार से दूरी: घर के अन्य सदस्यों के साथ समय बिताने की बजाय बच्चा अकेले गेम खेलना पसंद करता है।

नींद की कमी: देर रात तक गेम खेलने के कारण सुबह देर से उठने में समस्या होती है।

गेम्स की अनवरत चर्चा: बच्चों का हर वार्तालाप गेम्स से जुड़ा होता है, इससे उनके सामाजिक रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं।

यदि इन लक्षणों को लगातार देखा जाए, तो यह संकेत हो सकता है कि बच्चे की मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

गेमिंग की लत क्यों बढ़ रही है?

आजकल के मोबाइल गेम्स बच्चों को इस तरह आकर्षित करते हैं कि वे घंटों तक खेलते रहें। इन खेलों में लेवल, रिवार्ड और ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा की विशेषताएँ होती हैं, जो बच्चों को और अधिक आकर्षित करती हैं। खासकर 8 से 16 वर्ष के बच्चे इस प्रभाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इस उम्र में बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास होता है, और ऐसे में यह गेमिंग की लत उन्हें और भी प्रभावित कर सकती है।

अभिभावकों को क्या करना चाहिए?

यह समस्या केवल बच्चों की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। अभिभावक बच्चों की मोबाइल स्क्रीन पर निर्भरता को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: बच्चों के मोबाइल उपयोग की एक निश्चित सीमा तय करें, ताकि वे अन्य गतिविधियों में भी समय दे सकें।

वैकल्पिक गतिविधियों को बढ़ावा दें: खेल, किताबें, और रचनात्मक कार्यों में बच्चों को प्रोत्साहित करें।

खुलकर संवाद करें: बच्चे से बिना डांटे यह समझने की कोशिश करें कि वह गेम क्यों खेलना पसंद करता है।

स्वयं उदाहरण बनें: माता-पिता का संतुलित मोबाइल उपयोग बच्चों को प्रेरित करता है। वे सीखते हैं कि कैसे मोबाइल का स्वस्थ उपयोग किया जा सकता है।