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Up Kiran,Digital Desk: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत विशेष महत्व रखता है, जिसे भगवान विष्णु की आराधना के रूप में मनाया जाता है। हर वर्ष कुल 24 एकादशी होती हैं, जिनमें दो एकादशी हर महीने पड़ती हैं। इस बार माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे जया एकादशी कहते हैं, आने वाली है। यह विशेष दिन विशेष रूप से पाप नाशक और जीवन में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है।

जया एकादशी का महत्व: एक विशेष दिन

माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह दिन पापों के नाश और आत्मशुद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि जया एकादशी का व्रत करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि पिशाच योनि से भी मुक्ति प्राप्त होती है। इस दिन को ‘पाप विनाशिनी’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह दिन व्यक्ति के जीवन में नकारात्मकता और दुखों को समाप्त करने की क्षमता रखता है।

जया एकादशी 2026 का समय

इस साल जया एकादशी 28 जनवरी 2026 को शाम 4:35 बजे से शुरू होकर 29 जनवरी को दोपहर 1:55 बजे तक समाप्त होगी। क्योंकि यह तिथि उदयातिथि है, जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि गुरुवार का दिन भी भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।

व्रत के नियम और पालन

जया एकादशी व्रत के दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि व्रत का सही रूप में फल मिले:

ब्रह्मचर्य का पालन करें – व्रत के दौरान संयमित जीवन जीना आवश्यक है।

मन में द्वेष और क्रोध से बचें – सकारात्मक विचार रखना चाहिए।

चावल का सेवन न करें – इस दिन चावल का त्याग करना महत्वपूर्ण है।

तुलसी के पत्ते न तोड़े – तुलसी माता के पत्ते के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें।

नाखून और बाल न काटें – यह दिन आत्मशुद्धि का है, इसलिए इसे उपेक्षित न करें।

प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से दूर रहें – तामसिक पदार्थों से बचना चाहिए।

व्रत पारण का समय

जया एकादशी व्रत का पारण 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को सुबह 7:10 बजे से शुरू होगा और 9:20 बजे तक रहेगा। यह समय विशेष रूप से व्रत के प्रभाव को और बढ़ाता है, क्योंकि पारण के बाद व्रति को अपना व्रत समाप्त करने का अवसर मिलता है।