Up Kiran,Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एक नई दिशा में कदम बढ़ाया है। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि राज्य में गन्ने के साथ अन्य फसलों की खेती को मिशन मोड में लागू किया जाए। यह कदम कृषि उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आमदनी में भी महत्वपूर्ण सुधार लाएगा। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के लिए कहा है।
किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अवसर
मुख्यमंत्री के मुताबिक, गन्ने के साथ तिलहन और दलहन फसलों की खेती से न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आमदनी का भी लाभ मिलेगा। कृषि विज्ञानियों का मानना है कि गन्ना क्षेत्र में इन फसलों का समावेश भूमि की उर्वरता बनाए रखते हुए किसानों के लिए आर्थिक लाभ का एक नया रास्ता खोलेगा।
गन्ना क्षेत्र में अंतः फसली खेती का महत्व
प्रदेश में करीब 29.50 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती की जाती है, जिसमें आधा क्षेत्र नया बोया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि अगर इस विशाल क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से अंतः फसली खेती को अपनाया जाए तो कृषि उत्पादन में व्यापक बदलाव आ सकता है। यह कदम न सिर्फ किसानों की आय को दोगुना कर सकता है, बल्कि इससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था में भी स्थिरता आएगी।
कौन सी फसलों को मिलेगा बढ़ावा?
मुख्यमंत्री ने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की सिफारिशों को मान्यता देते हुए कहा कि गन्ने के साथ रबी सीजन में सरसों और मसूर, और जायद सीजन में उड़द और मूंग की खेती की जाए। इन फसलों को जोड़ने से उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ बाजार में अच्छे मूल्य मिलने की संभावना भी है।
प्रभावी योजना के लिए मिशन मोड में कार्यान्वयन
सीएम योगी ने कृषि विभाग को आदेश दिया है कि इस योजना को कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे मिशन मोड में लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए, ताकि किसानों को समय-समय पर तकनीकी जानकारी और अनुदान की मदद मिल सके। कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालयों की मदद से क्षेत्र विशेष के लिए उपयुक्त फसल चयन सुनिश्चित किया जाएगा।
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