Up kiran,Digital Desk : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उत्तर प्रदेश में अपराध अनुसंधान (Crime Investigation) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (UPSIFS) के छात्रों को अब केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि फील्ड का असली 'धुरंधर' बनाया जाएगा। इसके लिए संस्थान देश के चार प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन करने जा रहा है।
KGMU में पोस्टमार्टम की लाइव बारीकियां सीखेंगे छात्र
संस्थान के डायरेक्टर डॉ. जी.के. गोस्वामी ने बताया कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के साथ होने वाला समझौता ऐतिहासिक साबित होगा। इसके तहत फॉरेंसिक के छात्र केज़ीएमयू के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में जाकर पोस्टमार्टम की लाइव प्रक्रिया देख सकेंगे। छात्र पंचनामा तैयार करने से लेकर वैज्ञानिक विश्लेषण तक की उन बारीकियों को समझेंगे, जो किसी भी आपराधिक गुत्थी को सुलझाने के लिए मेडिकल-लीगल नजरिए से अनिवार्य होती हैं।
जेलों में अपराधियों की 'साइकोलॉजी' समझेंगे भविष्य के एक्सपर्ट
यूपी कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के साथ हुए समझौते के तहत छात्रों को प्रदेश की जेलों का दौरा करने का मौका मिलेगा। यहाँ छात्र कैदियों की केस स्टडी करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे कि किसी अपराध के पीछे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण (Criminal Psychology) क्या होते हैं। यह अनुभव उन्हें एक कुशल फॉरेंसिक एक्सपर्ट बनाने में मदद करेगा, जो अपराधी की मानसिकता को भी डिकोड कर सके।
धीरूभाई अंबानी और महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट के साथ तकनीकी साझेदारी
संस्थान अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए गांधीनगर स्थित धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के साथ 'फैकल्टी और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम' शुरू करेगा। इसके जरिए गुजरात के विशेषज्ञ लखनऊ आकर छात्रों को साइबर और डिजिटल क्राइम की जटिलताएं सिखाएंगे। वहीं, गोरखपुर के महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर एक 'ज्वाइंट फॉरेंसिक लैब' स्थापित की जाएगी, जहाँ अत्याधुनिक तकनीकों पर संयुक्त रिसर्च होगी।
'जॉब-रेडी' विशेषज्ञों से मजबूत होगा यूपी का फॉरेंसिक ढांचा
इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य यूपी के छात्रों को डिजिटल क्राइम, साइबर फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों को सुलझाने के लिए पूरी तरह "जॉब-रेडी" बनाना है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर इतना सशक्त हो कि वैज्ञानिक जांच के जरिए अपराधियों को सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) को तेजी से बढ़ाया जा सके।




