Up Kiran, Digital Desk: भारत में किसान सिर्फ परंपरागत खेती ही नहीं करते बल्कि फलदार पेड़ों की खेती भी लंबे समय से करते आ रहे हैं। इनमें आम की खेती एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है जो न केवल घरेलू इस्तेमाल के लिए बल्कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी की जाती है। आम का बागान हर गांव या शहर में देखने को मिल जाता है खासकर उन क्षेत्रों में जहां इसे वाणिज्यिक लाभ के लिए उगाया जाता है। वर्तमान में आम का सीजन चल रहा है जिसकी तैयारी दिसंबर महीने से शुरू हो जाती है। हालांकि इस फसल की देखभाल पूरी साल भर करनी होती है तभी जाकर किसान इससे अच्छे लाभ की उम्मीद कर सकते हैं।
आंधी-तूफान से फसल को बचाने के उपाय
आम की खेती में एक बड़ा संकट आंधी और तूफान के रूप में आता है जो फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। जैसे ही आम का फल टिकोला (छोटा फल) बनता है और आकार लेने लगता है किसान को इसे सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश करनी होती है। तेज हवा या तूफान के दौरान आम गिर जाते हैं जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में सही प्रबंधन और तैयारी से इस नुकसान को कम किया जा सकता है।
आम की फसल का सही प्रबंधन
घोसी प्रखंड जहानाबाद के किसान संजय कुमार पिछले 20 वर्षों से आम की खेती कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर आम की खेती का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। परंतु इसमें लगातार देखभाल की आवश्यकता होती है। अगर किसी किसान ने समय रहते अपने बाग के लिए ध्यान नहीं दिया तो वह न केवल अपने निवेश को खो सकता है बल्कि फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। आम की फसल का प्रबंधन पूरे सालभर करना चाहिए न कि केवल फलन के समय। इससे न केवल फसल सुरक्षित रहती है बल्कि किसान की आमदनी भी स्थिर रहती है।
आंधी से बचाव के प्रभावी तरीके
आंधी या तूफान से आम के बागान को बचाने के लिए कुछ आसान और कारगर उपाय हैं। सबसे पहले किसान को अपने बाग के चारों ओर ऊंचे और मजबूत वृक्ष लगाने चाहिए। ये वृक्ष तेज हवाओं को रोकने का काम करते हैं और बाग के भीतर की फसल को सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा जब आम के पेड़ में मंजर (फूल) आ जाएं तो कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर स्प्रे का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे न केवल आम की फसल सुरक्षित रहती है बल्कि बेमौसम तूफान या आंधी से होने वाला नुकसान भी कम होता है।




