UP Kiran,Digital Desk: म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने पुतिन को 'युद्ध का गुलाम' बताते हुए कहा कि रूस की ओर से हो रहे हमले ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। जेलेंस्की का यह बयान यूक्रेन के नागरिकों और उनके संघर्ष को सामने लाते हुए रूस की आक्रामकता के दुष्परिणामों को उजागर करता है।
बिजली संकट: यूक्रेनी जनता की मुश्किलें
यूक्रेन में जारी युद्ध ने नागरिकों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जेलेंस्की ने कहा कि रूस के हमलों के कारण यूक्रेन का कोई भी बिजली संयंत्र सुरक्षित नहीं बचा। बिजली संकट ने लाखों नागरिकों को ठंड और कठिनाई में डाल दिया है। विशेष रूप से सर्दियों में, जहां बर्फीले मौसम में गर्मी और बिजली की भारी कमी के कारण लोग गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इस स्थिति का सीधा असर यूक्रेन के आम नागरिकों पर पड़ रहा है, जो युद्ध के शिकार हो चुके हैं।
सुरक्षा गारंटी के बिना कोई समझौता नहीं
युद्ध को समाप्त करने के लिए यूक्रेन के प्रयासों को लेकर जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन किसी भी तरह की रियायत पर सहमत नहीं होगा। उन्होंने म्यूनिख सम्मेलन में जोर दिया कि रूस की आक्रामकता के खिलाफ किसी भी समझौते के लिए मजबूत सुरक्षा गारंटी की आवश्यकता है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही वार्ता को लेकर जेलेंस्की ने कहा कि इस वार्ता में अक्सर रियायतों पर चर्चा होती है, लेकिन यह रियायतें यूक्रेन के लिए खतरे का कारण बन सकती हैं। उन्होंने इसे 1938 के म्यूनिख समझौते से तुलना करते हुए चेतावनी दी कि यह युद्ध की स्थिति को और बढ़ावा दे सकता है।



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