Corporate Highhandedness: सिर्फ लिखित ऑफर लेटर मांगना पड़ा भारी! कंपनी ने जॉइनिंग से पहले ही रद्द किया जॉब ऑफर, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

Corporate Highhandedness: सिर्फ लिखित ऑफर लेटर मांगना पड़ा भारी! कंपनी ने जॉइनिंग से पहले ही रद्द किया जॉब ऑफर, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

कॉर्पोरेट जगत में नौकरी पाने के लिए उम्मीदवारों को कई दौर के कड़े इंटरव्यू (Job Interview) से गुजरना पड़ता है। लेकिन क्या हो जब सारे राउंड क्लियर करने और नौकरी पक्की होने के बाद, सिर्फ एक बुनियादी हक मांगने पर आपकी नौकरी छीन ली जाए? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) और एक्स (X) पर एक ऐसा ही बेहद चौंकाने वाला मामला वायरल हो रहा है। एक योग्य कैंडिडेट को कंपनी से केवल औपचारिक 'रिटन ऑफर लेटर' (Written Offer Letter) मांगना इतना भारी पड़ गया कि कंपनी के एचआर (HR) और मैनेजमेंट ने जॉइनिंग से ठीक पहले उसका जॉब ऑफर ही वापस (Rescinded) ले लिया। इस घटना के स्क्रीनशॉट्स वायरल होने के बाद इंटरनेट पर युवाओं और प्रोफेशनल वर्कफोर्स का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

मौखिक रूप से कहा 'सिलेक्टेड', लेकिन लिखित लेटर देने में आनाकानी

वायरल पोस्ट के अनुसार, पीड़ित उम्मीदवार ने एक नामी स्टार्टअप/कंपनी में एक महत्वपूर्ण पद के लिए आवेदन किया था। सभी तकनीकी और एचआर राउंड सफलतापूर्वक पास करने के बाद, कंपनी के हायरिंग मैनेजर ने उसे फोन पर बधाई दी और मौखिक रूप से (Verbally) सूचित किया कि उसका चयन हो चुका है। साथ ही उसे अगले सोमवार से ऑफिस जॉइन करने के लिए कह दिया गया। चूंकि पेशेवर नियमों के मुताबिक बिना लिखित दस्तावेज के पुरानी नौकरी छोड़ना या नई जगह जॉइन करना जोखिम भरा होता है, इसलिए कैंडिडेट ने एचआर को एक बेहद विनम्र ईमेल भेजा। ईमेल में उसने अनुरोध किया कि जॉइनिंग फॉर्मैलिटीज को आगे बढ़ाने के लिए उसे आधिकारिक ईमेल पर 'लिखित ऑफर लेटर' और सैलरी ब्रेकअप भेज दिया जाए।

कंपनी का अहंकार: "हमें ऐसे लोग पसंद नहीं जो हम पर भरोसा न करें"

लिखित ऑफर लेटर भेजने के बजाय, कंपनी के मैनेजमेंट की तरफ से जो जवाब आया, उसने हर किसी के होश उड़ा दिए। कंपनी के एचआर ने कैंडिडेट को एक रूखा संदेश भेजते हुए लिखा कि हमें आपकी तरफ से लिखित ऑफर लेटर की मांग करने का रवैया पसंद नहीं आया। हमारी कंपनी आपसी भरोसे पर चलती है। यदि आप जॉइनिंग से पहले ही हमारे मौखिक वादे पर संदेह कर रहे हैं और कागजी कार्रवाई पर इतना जोर दे रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप हमारी कार्य संस्कृति (Company Culture) के लिए सही नहीं हैं। इसलिए, हम आपका जॉब ऑफर तत्काल प्रभाव से रद्द (Cancel) कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर फूटा पेशेवरों का गुस्सा, 'टॉक्सिक कल्चर' पर छिड़ी बहस

पीड़ित उम्मीदवार ने जब इस बातचीत का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया, तो देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई। हज़ारों कॉर्पोरेट कर्मचारियों और मानव संसाधन विशेषज्ञों (HR Experts) ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का मानना है कि कैंडिडेट का पक्ष बिल्कुल सही था क्योंकि किसी भी प्रोफेशनल नौकरी में बिना लिखित कॉन्ट्रैक्ट के काम करना कानूनी और वित्तीय रूप से असुरक्षित है। इसे सोशल मीडिया पर एक बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) माना जा रहा है। लोगों ने कहा कि अच्छा हुआ कि कैंडिडेट इस 'टॉक्सिक' (विषाक्त) कंपनी में शामिल होने से बच गया। जो कंपनी शुरुआत में ही इतनी तानाशाही दिखा रही है, वह भविष्य में सैलरी रोकने या कभी भी नौकरी से निकालने में संकोच नहीं करती। सोशल मीडिया पर युवाओं ने ऐसी कंपनियों का नाम सार्वजनिक कर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है, जो रोजगार कानूनों और बुनियादी कॉर्पोरेट एथिक्स का मज़ाक उड़ाती हैं। यह वायरल मामला एक बार फिर साबित करता है कि आज का युवा कार्यबल केवल नौकरी पाने के लिए अपने स्वाभिमान और पेशेवर अधिकारों से समझौता करने को तैयार नहीं है।

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