कैश संभालने वालों के कपड़ों में जेब नहीं होगी; सिर्फ 43 लोगों को अंदर जाने की इजाज़त; राम मंदिर में सुरक्षा के नए इंतजाम
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान की चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा ने कैश गिनने वाले कर्मचारियों के लिए नियमों में ढील दी थी, जिससे चोरी करना आसान हो गया। पुलिस को कुछ बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के सबूत मिले हैं और अब अनिल मिश्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
इस बड़ी गड़बड़ी के बाद ट्रस्ट ने मंदिर के दान पात्रों से लेकर कैश गिनने वाले कमरे तक सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं। SIT की शुरुआती जांच से पता चला है कि अनिल मिश्रा की मुख्य जिम्मेदारी वित्तीय लेन-देन, कैश जमा करने और गिनती की प्रक्रिया की देखरेख करना था। जब बैंक के साथ मिलकर कैश गिनने के नियम तय किए गए थे, तब उन्होंने ही ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व किया था।
इसके बावजूद मिश्रा ने कैश गिनने वाले कर्मचारियों के पहनावे, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और स्क्रीनिंग से जुड़े कड़े नियमों में ढील दी थी। इससे कर्मचारियों के लिए चोरी करना आसान हो गया। अब इस लापरवाही के कारण उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
'बिना जेब वाली' यूनिफॉर्म और CCTV निगरानी: सुरक्षा में बड़े बदलाव
इस घटना से सबक लेते हुए ट्रस्ट ने सुरक्षा और गिनती की प्रक्रिया को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। अब कैश गिनने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाली खास यूनिफॉर्म पहननी होगी। गिनती वाली जगह पर 13 नए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और पूरी गिनती प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी।
मंदिर परिसर से गिनती केंद्र तक दान पात्रों को सुरक्षित ले जाने के लिए 27 अतिरिक्त स्पेशल सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए गए हैं। पिलर नंबर 34 के पास, जहां गुमनाम दान पात्र रखा है, अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा तैनात की गई है। अब से, केवल 43 अधिकृत लोगों को ही कैश गिनने वाले कमरे में जाने की अनुमति होगी।
डिजिटल सिग्नेचर बंद; अब तीन अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य
ट्रस्ट ने न केवल सुरक्षा नियमों में बल्कि अपनी बैंकिंग प्रक्रियाओं में भी बड़े बदलाव किए हैं। किसी भी बैंकिंग लेन-देन के लिए अब डिजिटल सिग्नेचर स्वीकार नहीं किए जाएंगे; इसके बजाय, तीन खास अधिकारियों—जनरल सेक्रेटरी डॉ. कृष्ण मोहन, चीफ इंजीनियर जगदीश आफले और CA चंदन राय—के हस्ताक्षर अनिवार्य कर दिए गए हैं।
इस बीच, चोरी के मामले में जेल भेजे गए कर्मचारियों के अलावा, लंबे समय से काम कर रहे दूसरे कर्मचारी भी अपना काम जारी रखे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कुछ कर्मचारियों को मूल रूप से हाउसकीपिंग के काम के लिए रखा गया था, लेकिन उन्हें कैश गिनने जैसे अहम काम सौंप दिए गए थे।