लिवर की बीमारी चुपचाप बढ़ती है, शरीर में दिखें ये 6 संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान

लिवर की बीमारी चुपचाप बढ़ती है, शरीर में दिखें ये 6 संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान

शरीर के सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण अंगों में शुमार लिवर जब अस्वस्थ होने लगता है, तो अक्सर शुरुआती दौर में कोई बड़ा या स्पष्ट अलार्म नहीं बजाता। यही वजह है कि अधिकांश लोग खुद को बिल्कुल फिट समझते रहते हैं, जबकि लिवर के भीतर फैट जमने, सूजन आने या फाइब्रोसिस विकसित होने जैसी घातक प्रक्रियाएं चुपचाप शुरू हो चुकी होती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार फैटी लिवर, वायरल हेपेटाइटिस या एल्कोहल से जुड़ी लिवर की परेशानियां लंबे वक्त तक बिना किसी चेतावनी के शरीर को खोखला करती हैं और अंततः सिरोसिस जैसी जानलेवा स्थिति का रूप ले लेती हैं।

लिवर की बीमारियां शुरुआती दौर में क्यों बन जाती हैं 'साइलेंट किलर'?

लिवर की सबसे बड़ी खासियत और कमजोरी यह है कि यह शुरुआत में दर्द या असहजता का जोरदार संकेत नहीं देता। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के मेडिकल संदर्भों के मुताबिक फैटी लिवर—जिसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है—के ज्यादातर मामलों में मरीज को किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी महसूस नहीं होती। जब समस्या थोड़ी आगे बढ़ती है, तभी शरीर में हल्की सुस्ती, निरंतर भारी थकान या पसलियों के ठीक नीचे पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्का खिंचाव या दबाव महसूस हो सकता है।

फैटी लिवर: सिर्फ वसा का जमना नहीं, फाइब्रोसिस का भी है बड़ा खतरा

मायो क्लिनिक की रिपोर्टों के अनुसार, जब लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से बहुत अधिक वसा (फैट) जमा होने लगती है, तो यह स्थिति फैटी लिवर कहलाती है। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ता मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप-2 डायबिटीज, खराब मेटाबॉलिज्म और हाई ट्राइग्लिसराइड्स इसके सबसे प्रमुख कारक हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि ब्लड टेस्ट या रूटीन अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर का पता चलने पर इसे 'मामूली समस्या' समझकर टालना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि लापरवाही बरतने पर यह आगे चलकर गंभीर लिवर सूजन और स्थायी फाइब्रोसिस में बदल जाता है।

हेपेटाइटिस और एल्कोहल: लिवर की सूजन और सिरोसिस का दोहरा वार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस लिवर में गंभीर सूजन पैदा करते हैं। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी लंबे समय तक निष्क्रिय रहकर क्रोनिक लिवर डिजीज, सिरोसिस और लिवर कैंसर तक का जोखिम पैदा कर देते हैं।

दूसरी तरफ, लंबे समय तक शराब का अत्यधिक सेवन लिवर के सेल्स को नष्ट कर एल्कोहलिक लिवर डिजीज का कारण बनता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब लिवर के स्वस्थ टिश्यू की जगह स्कार टिश्यू (घाव के निशान) ले लेते हैं, तो इसे लिवर सिरोसिस कहा जाता है। एडवांस स्टेज में पहुंचने पर पेट में पानी भरना (एसाइटिस), भ्रम की स्थिति, नसों से रक्तस्राव और अंगों की विफलता का खतरा मंडराने लगता है।

शरीर में दिखने वाले 6 शुरुआती चेतावनी संकेत, जिन्हें न करें नजरअंदाज

यदि दैनिक दिनचर्या में बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार थकान और कमजोरी बनी रहे, तो यह लिवर पर दबाव का पहला संकेत हो सकता है। इसके अतिरिक्त अचानक भूख कम हो जाना, बिना प्रयास वजन तेजी से गिरना, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में लगातार असहजता या दर्द रहना, त्वचा पर बिना चकत्ते के लगातार खुजली होना, पैरों या पेट में सूजन (एडिमा) का उभरना, गहरे पीले या भूरे रंग का पेशाब आना और आंखों या त्वचा में पीलिया (जॉन्डिस) की झलक दिखना ऐसे लक्षण हैं जिन पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और अल्ट्रासाउंड जांच कराकर जीवनशैली में सुधार करने से लिवर को स्थायी रूप से डैमेज होने से बचाया जा सकता है।