न तेल, न बाती, न माचिस! सिर्फ एक चम्मच पानी डालते ही जगमगा उठता है ये जादुई दीया; जानें इसके पीछे का विज्ञान
दिवाली रोशनी और खुशियों का पावन पर्व है, जहां पारंपरिक रूप से घर-आंगन को मिट्टी के दीयों, तेल और रुई की बाती से सजाया जाता रहा है। आधुनिक दौर में त्योहार की यह परंपरा भी पूरी तरह 'हाई-टेक' रूप ले चुकी है। इस बार बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर 'वॉटर-सेंसर इलेक्ट्रिक दीयों' की जबरदस्त मांग देखी जा रही है। देखने में बिल्कुल पारंपरिक मिट्टी के दीये जैसे लगने वाले इन दीयों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें न तो तेल की जरूरत होती है, न बाती की और न ही इन्हें चालू या बंद करने के लिए कोई स्विच दबाना पड़ता है। बस एक चम्मच सामान्य पानी डालते ही ये दीये चमकदार और खूबसूरत रोशनी बिखेरने लगते हैं।
पानी से जलने वाले इन जादुई दीयों की कार्यप्रणाली बेहद सरल और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक सर्किट पर आधारित है। दीये के डिजाइन पर गौर करें तो बीच में एक छोटी एलईडी लाइट लगी होती है, जिसके दोनों सिरों पर धातु के दो बारीक पिन (इलेक्ट्रोड्स) दिए रहते हैं। यही दोनों पिन वॉटर सेंसर का काम करते हैं। दीये के निचले हिस्से में हाथ घड़ी में इस्तेमाल होने वाली छोटी बटन-सेल (सिक्के जैसी) बैटरियां फिट होती हैं। सामान्य स्थिति में जब दीया सूखा रहता है, तो दोनों धातु की पिनों के बीच हवा होने के कारण सर्किट खुला (ओपन) रहता है और करंट प्रवाहित नहीं होता, जिससे लाइट बंद रहती है।
जैसे ही दीये में पानी डाला जाता है, विज्ञान का सीधा नियम काम करने लगता है। घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान्य नल या सप्लाई के पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और सोडियम जैसे कई प्राकृतिक खनिज (मिनरल्स) और आयन मौजूद होते हैं। पानी दोनों मेटल पिनों के संपर्क में आते ही एक कंडक्टर (बिजली के पुल) का काम करता है, जिससे सर्किट तुरंत पूरा हो जाता है और एलईडी लाइट जगमगा उठती है।
इसके पीछे का विज्ञान जानें
इस तकनीक से जुड़ा एक बेहद रोचक वैज्ञानिक पहलू यह भी है कि ये दीये पूरी तरह शुद्ध पानी या बहुत कम टीडीएस वाले आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) पानी से काम नहीं करते। अत्यधिक शुद्ध पानी में मिनरल्स और आयन न होने के कारण बिजली का प्रवाह नहीं हो पाता। हालांकि, अगर ऐसे पानी में एक चुटकी साधारण नमक मिला दिया जाए, तो पानी में आयनों की संख्या बढ़ते ही दीया तुरंत जलने लगता है। एलईडी तकनीक पर आधारित होने की वजह से ये दीये बेहद कम बैटरी की खपत करते हैं और तीन छोटी बटन बैटरियों के दम पर लगातार 40 से 50 घंटे तक रोशनी देते हैं। इन्हें बुझाने के लिए केवल पानी उड़ेलकर कपड़े से सुखा देना होता है, जिससे सर्किट टूटते ही लाइट बंद हो जाती है। बैटरी खत्म होने पर नीचे का ढक्कन खोलकर आसानी से नई बैटरी भी लगाई जा सकती है। धुआं, आग और तेल के दाग-धब्बों से मुक्त यह सुरक्षित विकल्प घरों में खूब पसंद किया जा रहा है।