दुनिया का अनोखा गांव: जहां इंसानों से ज्यादा रहते हैं पुतले, हैरान कर देगी इसके पीछे की वजह

दुनिया का अनोखा गांव: जहां इंसानों से ज्यादा रहते हैं पुतले, हैरान कर देगी इसके पीछे की वजह

इस दुनिया में अजीबो-गरीब और रहस्यमयी जगहों की कोई कमी नहीं है, लेकिन क्या आप किसी ऐसे गांव की कल्पना कर सकते हैं जहां इंसानों से कई गुना ज्यादा पुतले (Scarecrows/Dolls) रहते हों? जी हां, यह कोई हॉरर फिल्म की कहानी नहीं बल्कि एक हकीकत है। सोशल मीडिया और ग्लोबल टूरिज्म मैप पर यह जगह 'पुतलों वाले गांव' के नाम से मशहूर हो चुकी है। पहली नजर में इस गांव को देखने पर ऐसा लगता है जैसे कोई मेला लगा हो या लोग सड़कों पर घूम रहे हों, लेकिन करीब जाने पर पता चलता है कि वे सब बेजान पुतले हैं। आइए जानते हैं कि यह अनोखा गांव कहां है और इसके पीछे की बेहद भावुक कर देने वाली वजह क्या है।

कहां है यह रहस्यमयी पुतलों का गांव

इंसानों से ज्यादा पुतलों की आबादी वाला यह अनोखा गांव जापान के शिकोकू द्वीप पर स्थित है, जिसे नागोरो गांव (Nagoro Village) के नाम से जाना जाता है। इस गांव को दुनिया भर में 'जापानी डॉल्स विलेज' भी कहा जाता है। आज के समय में इस पूरे गांव में बमुश्किल 25 से 30 इंसान ही जीवित बचे हैं, जबकि पूरे गांव में अलग-अलग जगहों पर सजे हुए पुतलों की संख्या 400 से भी ज्यादा है। खेत-खलिहान, बस स्टॉप, घरों के बरामदे, स्कूल की बेंच और सड़कों के किनारे, आपको हर जगह इंसानी कद के ये पुतले ही नजर आएंगे।

क्यों बनाई गई पुतलों की यह अनोखी दुनिया

इस पूरे सिलसिले की शुरुआत किसी अंधविश्वास या भूतिया कहानी से नहीं, बल्कि एक महिला के अकेलेपन को दूर करने की कोशिश से हुई थी। करीब दो दशक पहले, त्सुकिमी अयानो (Tsukimi Ayano) नाम की एक महिला अपने पुश्तैनी गांव नागोरो वापस लौटीं। उन्होंने देखा कि रोजगार और आधुनिक जीवन की तलाश में गांव के युवा बड़े शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं और बुजुर्गों की मौत हो चुकी है। पूरा गांव सूना और वीरान हो चुका था। अपने अकेलेपन को दूर करने और गांव के पुराने दिनों की चहल-पहल को याद रखने के लिए उन्होंने उन लोगों के पुतले बनाने शुरू किए जो गांव छोड़कर चले गए थे या जिनका निधन हो चुका था।

स्कूल से लेकर बस स्टॉप तक बिखरी यादें

त्सुकिमी अयानो ने इन पुतलों को सिर्फ खेतों में कौवे भगाने के लिए नहीं, बल्कि समाज के एक हिस्से के रूप में तैयार किया। उन्होंने गांव के बंद हो चुके एकमात्र स्कूल को जीवंत करने के लिए क्लासरूम की कुर्सियों पर बच्चों और टीचर्स के पुतले बनाकर बैठा दिए। बस स्टॉप पर एक पुतला इस तरह खड़ा किया गया है जैसे वह किसी बस का इंतजार कर रहा हो। खेतों में काम करते, बातचीत करते और आराम करते हुए इन पुतलों को देखकर ऐसा भ्रम होता है कि गांव आज भी पूरी तरह से आबाद है। अयानो हर पुतले को खास कपड़े पहनाती हैं और समय-समय पर उनकी मरम्मत भी करती हैं।

ग्लोबल टूरिस्ट स्पॉट बना यह वीरान गांव

शुरुआत में भले ही यह कोशिश गांव के सूनेपन को भरने के लिए की गई थी, लेकिन आज यह नागोरो गांव दुनिया भर के पर्यटकों और डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर्स के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र बन चुका है। जापान आने वाले विदेशी सैलानी इस अनोखी कलाकृति और इसके पीछे की मार्मिक कहानी को देखने के लिए विशेष रूप से यहां आते हैं। यह गांव इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे कला के जरिए एक मरते हुए गांव को दुनिया भर में अमर कर दिया गया।

 

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