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Up kiran,Digital Desk : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के तबादले और समायोजन को लेकर एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE)-2009 के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी शिक्षक की व्यक्तिगत सुविधा या कठिनाई के मुकाबले 'छात्र हित' ही सर्वोपरि माना जाएगा। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने इस टिप्पणी के साथ ही बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

प्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2025 को बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) और स्थानांतरण को लेकर एक शासनादेश जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ चित्रकूट, मिर्जापुर, मैनपुरी, गोरखपुर और जालौन समेत कई जिलों के सैकड़ों शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं में अरुण प्रताप सिंह, संगीता सिंह और स्वदेश कुमार जैसे शिक्षक शामिल थे। इनका तर्क था कि बीच सत्र में तबादले से पढ़ाई प्रभावित होगी और सरकार की नीति में पारदर्शिता की कमी है।

'स्कूलों में शिक्षक नहीं तो पढ़ाई कैसे होगी?'

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के कई स्कूल ऐसे हैं जहां छात्रों की संख्या ज्यादा है लेकिन शिक्षक कम हैं, या बिल्कुल नहीं हैं। ऐसे में छात्र-शिक्षक अनुपात (Student-Teacher Ratio) को संतुलित करना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने सरकार की दलील को सही मानते हुए कहा कि जहां शिक्षकों की कमी है, वहां समायोजन करना कार्यपालिका का अधिकार है और यह छात्रों के हित में उठाया गया कदम है। कोर्ट ने कहा कि जब तक नीति में कोई भेदभाव या कानून का उल्लंघन न हो, अदालत उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।

शिक्षकों को दी गई आखिरी राहत

भले ही कोर्ट ने तबादला रोकने से इनकार कर दिया हो, लेकिन शिक्षकों की समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने आदेश दिया है कि अगर किसी शिक्षक को तबादला प्रक्रिया में कोई विसंगति लगती है या उनकी कोई व्यक्तिगत शिकायत है, तो वे एक सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। कोर्ट ने जिला समितियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसी शिकायतों का निपटारा एक महीने के भीतर तार्किक आधार पर करें। इसके अलावा, अधिकारियों को 'यू डायस प्लस' (U-DISE+) पोर्टल पर छात्रों और शिक्षकों का सही डाटा अपडेट करने की भी हिदायत दी गई है।