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पाकिस्तान को ऑस्ट्रेलिया ने दिया बड़ा झटका, बंद कर दी ये मदद

पाकिस्तान पिछले कुछ दिनों से खुद के देश के अंदर मुसीबतों का सामना कर ही रहा था कि अब बाहर से भी एक मुसीबत उसके सामने आ गई है. जिसका तगड़ा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है. ऑस्ट्रेलिया की मोरिसन सरकार ने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोकने का फैसला किया है.


गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान की गरीब महिलाओं और लड़कियों की मदद के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराता था. जिससे वहां की महिलाओं और लड़कियों की ज़िदगी में सुधार लाया जा सके. लेकिन इस मदद को रोकने के बाद अब पाकिस्तान पर एक और भार बढ़ गया है.

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वहीं द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया 70 साल से पाकिस्तान की आर्थिक मदद करता रहा है लेकिन अब वह 2020-21 से विकास कार्यों के लिए दी जाने वाली सरकारी मदद को खत्म कर देगा.

गौरतलब है कि 2018-19 में पाकिस्तान को दी जाने वाली 3.9 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद 2019-20 में 1.9 करोड़ डॉलर कर दी गई और 2020-21 में इसे पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा. वहीं जब पाकिस्तान के वित्तीय मदद कार्यक्रम को लेकर आई परफॉर्मेंस रिपोर्ट में कहा गया है, ऑस्ट्रेलिया द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली फंडिंग अब प्रशांत क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट पर खर्च की जाएगी.

पाकिस्तान एशिया के सबसे गरीब देशों में से एक है और संयुक्त राष्ट्र मानव विकास सूचकांक में 178 देशों की लिस्ट में 150वें स्थान पर है. यह सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और आय के आधार पर तय किया जाता है.

बताया जा रहा है कि इस नीतिगत बदलाव के पीछे एक वजह ऑस्ट्रेलिया के आस-पास के क्षेत्रों में चीन के प्रभाव का बढ़ना भी है. ऑस्ट्रेलिया की विदेशों को दी जाने वाली कुल आर्थिक मदद 2013 के बाद से 27 फीसदी घटी है और वर्तमान में वह अपने कुल खर्च का 0.82 फीसदी ही फंडिंग में देता है. इस कटौती के बावजूद ऑस्ट्रेलिया की मोरिसन सरकार ने प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है और 2019-20 में इस क्षेत्र में 1.4 अरब डॉलर वित्तीय सहायता में खर्च किए गए.

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वहीं ऑस्ट्रेलिया ऐड प्रोग्राम के एक विश्लेषक प्रोफेसर स्टीफेन हुवेस ने कहा, यह शर्मिंदगी का विषय है कि पाकिस्तान के विकास कार्यों की कीमत पर प्रशांत क्षेत्र में वित्तीय सहायता मुहैया कराई जा रही है. कोई भी ऐसा दावा नहीं कर सकता है कि पाकिस्तान से ज्यादा प्रशांत क्षेत्र को आर्थिक मदद की जरूरत है.

आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार का पाकिस्तान को आर्थिक मदद रोकने का फैसला 2015 की उसकी नीति से बिल्कुल उलट है. उस वक्त ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान के लिए निवेश की घोषणा करते हुए कहा था कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण पाकिस्तान से उसके हित जुड़े हुए हैं. मोरिसन सरकार ने अप्रैल में ऐड बजट समरी जारी करते हुए कहा था, पाकिस्तान में लैंगिक असमानता चरम पर है और 10 में से 9 पाकिस्तानी महिलाओं को हिंसा का सामना करना पड़ता है.

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान के साथ साझा हितों के क्षेत्र में काम करना जारी रखेगा जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, मानवाधिकार और क्षेत्रीय सुरक्षा शामिल हैं.

हालांकि, पाकिस्तान क्षेत्रीय फंडिंग और ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप के रूप में कुछ मदद मिलती रहेगी. मिकाह ऑस्ट्रेलिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर टिम कोस्टेलो ने कहा, मोरिसन सरकार पाकिस्तान से किनारा कर रही है. हम प्रशांत क्षेत्र में आगे बढ़ने का समर्थन करते हैं लेकिन यह पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद की कीमत पर नहीं होना चाहिए.

ऑस्ट्रेलिया ने 2009 में पाकिस्तान को 7 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद की थी जो अपने आप में एक रिकॉर्ड था. बता दें कि अमेरिका ने भी पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद में भारी कटौती की है. पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान ने उनके देश को बेवकूफ बनाने के अलावा कुछ नहीं किया.

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