बिहार में बनेगा 150 KM का फोरलेन कॉरिडोर, 8200 करोड़ से बदलेगी इन 5 जिलों की तस्वीर
बिहार में धार्मिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'राम जानकी पथ' परियोजना के शेष बचे हिस्से का निर्माण कार्य अब तेजी से धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। उत्तर बिहार और सीमावर्ती क्षेत्रों के सड़क नेटवर्क को नई ऊंचाई देने वाली इस महात्वाकांक्षी परियोजना के तीसरे और चौथे पैकेज की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी है। इन दोनों चरणों के निर्माण पर लगभग 8,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
मशरख से भिट्टा मोड़ तक 150 किलोमीटर लंबा फोरलेन कॉरिडोर
तैयार डीपीआर के अनुसार, सारण जिले के मशरख से लेकर सीधे बिहार-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित सीतामढ़ी के भिट्टा मोड़ तक करीब 150 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक फोरलेन मार्ग तैयार किया जाएगा।
राज्य सड़क निर्माण विभाग की ओर से इस अंतिम डीपीआर को वित्तीय व तकनीकी स्वीकृति के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भेजा जा रहा है। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही सड़क निर्माण कंपनियों के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
5 जिलों के 107 गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण
मशरख से भिट्टा मोड़ के बीच 150 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन एक्सप्रेसवे के लिए पांच प्रमुख जिलों के 107 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। अधिग्रहित होने वाले गांवों में पूर्वी चंपारण के सर्वाधिक 48 गांव, सीतामढ़ी के 31 गांव, गोपालगंज के 13 गांव, सारण के 10 गांव और शिवहर के 5 गांव शामिल हैं। परियोजना के तीसरे पैकेज के तहत मशरख से शिवहर तक लगभग 76 किलोमीटर सड़क को फोरलेन में तब्दील किया जाएगा। केंद्रीय मंत्रालय से डीपीआर को मंजूरी मिलते ही जिला स्तर पर भू-अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की कानूनी प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
उत्तर बिहार के 5 जिलों और भारत-नेपाल सीमा तक कनेक्टिविटी होगी सुपरफास्ट
इस फोरलेन कॉरिडोर के पूरा होने से सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, शिवहर और सीतामढ़ी जिलों के बीच यातायात बेहद सुगम, तेज और सुरक्षित हो जाएगा। इसके अलावा, भारत से नेपाल सीमा तक व्यापारिक और धार्मिक आवागमन करने वाले यात्रियों व मालवाहकों को भी जाम से मुक्ति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि राम जानकी पथ परियोजना के पहले और दूसरे पैकेज के तहत करीब 90 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य पहले से ही युद्धस्तर पर जारी है। शेष 150 किमी के जुड़ते ही अयोध्या से जनकपुर धाम के बीच का यह आध्यात्मिक कॉरिडोर पूरी क्षमता के साथ संचालित होने लगेगा।