बिहार की सियासत...राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह फिर बनेंगे MLC उम्मीदवार, लालू-तेजस्वी ने आधी रात को दिए खास निर्देश
बिहार विधान परिषद (MLC Election) की 9 सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर पटना से लेकर दिल्ली तक का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। नामांकन के आखिरी दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर अपने सबसे भरोसेमंद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील कुमार सिंह पर ही दांव खेला है। एनडीए द्वारा अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान किए जाने के बाद से ही कयासों का दौर जारी था, लेकिन सोमवार को नामांकन की अंतिम तिथि के दिन राजद खेमे से बेहद बड़ी खबर सामने आई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की रजामंदी के बाद सुनील सिंह को अपने सभी जरूरी कागजात पूरी तरह तैयार रखने का निर्देश दिया गया है और वे आज ही महागठबंधन (महागठबंधन) की तरफ से अपना पर्चा दाखिल करेंगे।
दिल्ली में लालू-तेजस्वी की गुप्त बैठक, इसलिए आधिकारिक एलान में हुई देरी
सियासी गलियारों में इस बात को लेकर काफी चर्चा थी कि नामांकन के आखिरी दिन तक आरजेडी ने अपने पत्तों का खुलासा क्यों नहीं किया। दरअसल, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सिंगापुर से अपना रूटीन चेकअप कराकर शनिवार देर रात दिल्ली वापस लौटे हैं और अपनी बड़ी बेटी व सांसद मीसा भारती के सरकारी आवास पर रुके हैं। वहीं, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी सोमवार को दिल्ली में आयोजित इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए वहीं रुके हुए हैं। शीर्ष नेतृत्व के पटना में न होने की वजह से रविवार देर रात तक उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक सूची जारी नहीं हो सकी, लेकिन अंदरखाने सुनील सिंह के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी गई थी।
25 विधायकों का जादुई आंकड़ा, संख्याबल के हिसाब से आरजेडी की एक सीट बिल्कुल पक्की
बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो कुल 243 सदस्यों वाली विधानसभा में इस समय एनडीए (NDA) के पास करीब 202 विधायकों का भारी-भरकम समर्थन हासिल है। इस चुनाव के मौजूदा गणित के हिसाब से किसी भी उम्मीदवार को विधान परिषद पहुंचने के लिए कम से कम 25 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत होती है। इस सियासी और गणितीय समीकरण के लिहाज से जहां एनडीए के खाते में आसानी से 8 सीटें जाती हुई दिखाई दे रही हैं, वहीं संख्याबल के आधार पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की एक सीट पर जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है। इसी इकलौती सुरक्षित सीट पर राजद ने अपने पुराने दिग्गज सुनील सिंह को दोबारा मौका देने का फैसला किया है।
ओवैसी की पार्टी AIMIM ने तेजस्वी से मांगा था वादा, दांव खाली जाने की आशंका
राजद द्वारा सुनील सिंह का नाम फाइनल किए जाने के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को बड़ा झटका लग सकता है। चुनाव की सुगबुगाहट के बीच एआईएमआईएम की बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने तेजस्वी यादव से एक सीट की खुली मांग की थी। इमान ने राजद को याद दिलाते हुए कहा था कि 'जब हमने राज्यसभा चुनाव के दौरान अपनी दावेदारी छोड़कर इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार का बिना शर्त समर्थन किया था, तब तेजस्वी यादव ने वादा किया था कि वे भविष्य में हमारे राजनीतिक हितों का पूरा ख्याल रखेंगे। अब समय आ गया है कि तेजस्वी अपना वह वादा निभाएं।' हालांकि, आरजेडी ने अपनी सुरक्षित सीट पर किसी बाहरी को मौका देने के बजाय आंतरिक निष्ठावान नेता को तरजीह दी है।
11 जून तक नाम वापसी की मोहलत, 18 जून को डाले जाएंगे वोट
बिहार विधान परिषद के इस बड़े चुनावी कार्यक्रम की बात करें तो आज यानी सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन है, जिसके बाद 9 जून को सभी नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) की जाएगी। जो उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, वे 11 जून तक अपना पर्चा वापस ले सकेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो 9 सीटों के लिए आगामी 18 जून को सुबह से मतदान कराया जाएगा। आपको बता दें कि जून में जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें सुनील कुमार सिंह के अलावा कुमुद वर्मा, गुलाम गौस, मोहम्मद फारूक, भीष्म साहनी, संजय प्रकाश, समीर कुमार सिंह शामिल हैं। जबकि जेडीयू के श्रीभगवान सिंह कुशवाहा विधानसभा चुनाव में विधायक चुने जाने के बाद पहले ही इस सदन से इस्तीफा दे चुके हैं।