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आज ही सिखा दें ये 5 जरूरी घरेलू काम, वरना शादी के बाद पत्नी से सुनने पड़ सकते हैं ताने

भारतीय समाज में अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता बेटियों को बचपन से ही पढ़ाई-लिखी के साथ-साथ घर के कामकाज, कुकिंग और साफ-सफाई की ट्रेनिंग देना शुरू कर देते हैं। इसके उलट, बेटों को घर के बेसिक और जरूरी कामों से पूरी तरह दूर रखा जाता है। आज भी कई पेरेंट्स की पुरानी सोच यही है कि बेटा बड़ा होगा, उसकी शादी होगी और बहू आकर घर के साथ-साथ बेटे के सारे काम संभाल लेगी। लेकिन अब जमाना पूरी तरह बदल चुका है। आजकल की लड़कियां पढ़ी-लिखी और कामकाजी हैं, जो ऑफिस के साथ-साथ अकेले पूरा घर मैनेज नहीं कर सकती हैं। कई लड़कियों को कुकिंग में दिलचस्पी भी नहीं होती है। आज की जनरेशन की लड़कियां अपने लाइफ पार्टनर से बराबरी का सपोर्ट चाहती हैं, चाहे वह किचन का काम हो या घर की देखरेख। ऐसे में अगर आप अपने बेटे को आत्मनिर्भर नहीं बनाते हैं, तो भविष्य में उसे अपनी पत्नी पर निर्भर रहना पड़ेगा और यह ताना भी सुनना पड़ सकता है कि माता-पिता ने कोई काम सिखाया ही नहीं। इसलिए हर माता-पिता को अपने बेटों को कुछ बेसिक लाइफ स्किल्स जरूर सिखानी चाहिए।

1. कुकिंग सिर्फ शौक नहीं सर्वाइवल स्किल है, मैगी के भरोसे नहीं चलेगा काम

आज के समय में खाना बनाना आना सिर्फ एक हॉबी या शौक नहीं, बल्कि खुद के वजूद और सर्वाइवल के लिए बेहद जरूरी हो चुका है। बेटों को कम से कम बेसिक चीजें जैसे चाय, दाल, चावल, हरी सब्जी, गोल रोटी या कोई आसान सा भोजन बनाना जरूर आना चाहिए। अगर कुछ ज्यादा नहीं तो कम से कम खिचड़ी या तहरी ही एकदम परफेक्ट तरीके से बनाना सिखा दें। जब लड़का बेसिक चीजें बनाना सीख जाता है, तो समय आने पर वह दूसरी डिशेज भी आसानी से बना लेता है। सिर्फ मैगी या ऑमलेट बनाना सीख लेने को कुकिंग नहीं कहा जा सकता। खाना बनाना आने से लड़का किसी भी शहर या परिस्थिति में भूखा नहीं मरेगा।

2. कपड़े धोना, सुखाना और प्रेस करना सिखाएं, दूसरों पर निर्भरता होगी खत्म

अक्सर घरों में बेटियों से उम्मीद की जाती है कि वे कपड़े धोएं, उन्हें धूप में फैलाएं और सूखने के बाद समेटकर रखें। यही काम बेटों को भी बचपन से सिखाना चाहिए। बेटों को आदत डालें कि वे कम से कम अपने पर्सनल कपड़े खुद धोएं, उन्हें सही तरीके से सुखाएं और फोल्ड (तह) करके अलमारी में व्यवस्थित रखें। इसके साथ ही कपड़ों को खुद प्रेस (इस्त्री) करना भी सिखाएं। अगर बेटा अपना यह आधा काम खुद करने लगेगा, तो वह हॉस्टल में रहे या शादी के बाद अपने घर में, उसे अपने कपड़ों के लिए कभी किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

3. कमरे को बिखेरने की आदत छुड़ाएं, हाइजीन और डस्टिंग की दें ट्रेनिंग

लड़कों की यह आम आदत होती है कि वे जो चीज जहां से उठाते हैं, काम होने के बाद उसे वहीं छोड़ने के बजाय इधर-उधर फेंक देते हैं। बिस्तर बिखरा रहता है और तौलिया कहीं भी पड़ा रहता है। माता-पिता को अपने बेटों को सिखाना चाहिए कि वे जो सामान जहां से लें, इस्तेमाल के बाद उसे वापस उसी नियत स्थान पर रखें। अपने कमरे को हमेशा साफ, व्यवस्थित और हाइजीनिक रखना हर लड़के की जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसके अलावा लड़कों को घर में झाड़ू-पोछा लगाने, जाले साफ करने और डस्टिंग करने का काम भी जरूर सिखाना चाहिए ताकि वे स्वच्छता का महत्व समझें।

4. घरेलू बजट, राशन और मेड को मैनेज करना भी है पुरुषों की जिम्मेदारी

घर चलाने के लिए सिर्फ बाहर से पैसे कमाकर लाना ही काफी नहीं होता, बल्कि घर के अंदर के कई मैनेजमेंट संभालने होते हैं। जैसे बाजार जाकर सही और ताजा सब्जी चुनना, दूध और महीने के राशन का सामान लाना और पूरे खर्च का हिसाब-किताब रखना। इसके अलावा अगर घर में साफ-सफाई या खाना बनाने के लिए मेड या कुक लगी हुई है, तो उसे सही समय पर सैलरी देना और उसके साथ इंसानियत व सम्मान का व्यवहार करना भी बेटों को सिखाएं। ये सभी घर की वो बेसिक चीजें हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। यह सिर्फ घर की महिलाओं की ड्यूटी नहीं है, बल्कि पुरुषों को भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए।

5. अपना बैग खुद पैक करने की डालें आदत, जिम्मेदार इंसान बनने में मिलेगी मदद

कई लड़के और शादीशुदा पुरुष आज भी इस मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं कि अगर उन्हें किसी बिजनेस ट्रिप या वेकेशन पर बाहर जाना है, तो उनका ट्रैवल बैग उनकी मां या पत्नी ही पैक करके देंगी। इस निर्भरता वाली सोच को बदलने की सख्त जरूरत है। बेटों को सिखाएं कि वे यात्रा पर जाते समय अपनी जरूरत का हर छोटा-बड़ा सामान, दवाइयां और कपड़े खुद अपने बैग में पैक करें। अपनी अलमारी को हमेशा सेट रखें और सुबह सोकर उठने के बाद सबसे पहले अपना बिस्तर खुद व्यवस्थित करें। ये छोटी-छोटी आदतें आपके बेटे को एक जिम्मेदार और समझदार इंसान बनाएंगी, जिससे उसकी होने वाली पत्नी की लाइफ भी आसान होगी और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहेगी।

 

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