देह व्यापार का विरोध, मिली दर्दनाक मौत; जानिए क्या है बंटी यादव मर्डर केस
पटना: बिहार की राजधानी पटना के न्यू करबिगहिया इलाके से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाके में सक्रिय एक अवैध सेक्स रैकेट का लगातार विरोध करने पर बदमाशों ने एक फास्ट फूड दुकानदार बंटी कुमार का अपहरण कर लिया। इसके बाद उसे तड़पा-तड़पा कर खौफनाक मौत दी गई। हैवानियत की हदें पार करते हुए हत्यारों ने न सिर्फ बंटी के शरीर पर तेजाब डाला, बल्कि शव की पहचान छिपाने के लिए उसके दाहिने हाथ पर बने ‘मां’ के नाम के टैटू को भी चाकू से गोदकर मिटाने की कोशिश की। इस जघन्य हत्याकांड के बाद से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।
कड़े और पैर की रॉड से हुई क्षत-विक्षत शव की पहचान
बंटी कुमार का शव जब अथमलगोला थाना क्षेत्र से बरामद हुआ, तो उसकी हालत देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। शव इस कदर सड़-गल चुका था कि सामान्य रूप से पहचानना नामुमकिन था। चेहरे और शरीर के कई हिस्सों को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया गया था। परिजनों ने हाथ में पहने कड़े और पुराने ऑपरेशन के दौरान पैर में डाली गई लोहे की रॉड को देखकर बंटी की पहचान की। सबसे ज्यादा झकझोरने वाला मंजर वह था, जब परिजनों ने देखा कि बंटी के हाथ पर लिखे 'मां' शब्द को कातिलों ने चाकू से रेतकर मिटाने का क्रूर प्रयास किया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिटाई और सिर पर गंभीर चोट का खुलासा
बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में हुए बंटी के शव के पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट से पता चला है कि उसके सिर पर किसी भारी वस्तु से ताबड़तोड़ वार किए गए थे। डॉक्टरों ने अत्यधिक पिटाई को मौत की मुख्य वजह बताया है। मेडिकल टीम ने सटीक वैज्ञानिक साक्ष्यों के लिए बोन मैरो का नमूना और बिसरा सुरक्षित रख लिया है ताकि डीएनए (DNA) जांच की जा सके। परिजनों का दावा है कि बंटी को तड़पाने के लिए कातिलों ने उसके शरीर पर तेजाब भी फेंका था, जिसके गहरे निशान त्वचा पर मौजूद हैं।
सेक्स रैकेट का विरोध बना मौत का कारण, CCTV में कैद हुआ अपहरण
मृतक बंटी कुमार यादव न्यू करबिगहिया में फास्ट फूड की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके के कुछ दबंग और असामाजिक तत्व अवैध रूप से देह व्यापार (सेक्स रैकेट) का धंधा चला रहे थे। बंटी इस अनैतिक कार्य का पुरजोर विरोध कर रहे थे। इसी खुन्नस में मुख्य आरोपी रविश कुमार और उसके गुर्गों ने बंटी को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। 6 जुलाई की रात करीब 12:47 बजे पटना जंक्शन के पास से बंटी को अगवा कर लिया गया। यह पूरी वारदात वहां लगे एक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें बदमाश बंटी को जबरन ऑटो में बैठाकर बाईपास की तरफ ले जाते दिख रहे हैं।
तीन थानों के चक्कर में उलझी रही पुलिस, परिजनों ने उठाए सवाल
इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में पटना पुलिस की कार्यशैली भी गंभीर सवालों के घेरे में है। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने 7 जुलाई को ही मुख्य आरोपी के भाई को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था, जिसने अपहरण की बात कबूल भी की थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया। क्षेत्राधिकार के विवाद में मामला तीन थानों (कोतवाली, जक्कनपुर और अथमलगोला) के बीच घूमता रहा और पुलिस कागजी कार्रवाई में उलझी रही, जिसके कारण बंटी की जान नहीं बचाई जा सकी। कातिलों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे हत्या के बाद किराए के कमरे पर आए, खून से सने कपड़े बदले और आसानी से फरार हो गए।
"पापा कब आओगे?" बेटी की आखिरी कॉल ने पूरे परिवार को रुलाया
बंटी के जाने से उनका हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह बिखर गया है। बचपन में ही पिता को खोने वाले बंटी ने बेहद कम उम्र में पूरे घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली थी। 6 जुलाई की रात 12:34 बजे उनकी मासूम बेटी ने फोन कर पूछा था, "पापा, आप कब लौटेंगे?" तब बंटी ने कहा था कि दुकान का हिसाब समेटकर बस आ ही रहा हूं। लेकिन वह घर नहीं लौटे। बंटी अपने पीछे बूढ़ी मां, पत्नी, एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गए हैं। इस घटना ने अब राजनीतिक तूल भी प्राप्त कर लिया है और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल दागे हैं। फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।