भागलपुर में बदहाली की हद! जहां रोज पलट रहे वाहन, उस 'जंग के मैदान' बनी सड़क पर जनप्रतिनिधि क्यों हैं खामोश

भागलपुर में बदहाली की हद! जहां रोज पलट रहे वाहन, उस 'जंग के मैदान' बनी सड़क पर जनप्रतिनिधि क्यों हैं खामोश

बिहार में चकाचक सड़कों और सरकार के दावों की पोल भागलपुर जिले में खुलती नजर आ रही है। जिले के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली नवगछिया-तिनटंगा जहाज घाट रोड (14 नंबर सड़क) अपनी बदहाली के चरम पर पहुंच चुकी है। आलम यह है कि यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग अब सड़क कम और तालाब ज्यादा नजर आता है।

2 से 3 फीट गहरे गड्ढों में समाई सड़क

सड़क की स्थिति इतनी भयावह है कि तिनटंगा करारी, लत्तीपाकर, गोपालपुर पेट्रोल पंप के समीप और चपरघाट मोड़ जैसे प्रमुख इलाकों में पिच का नामोनिशान तक मिट गया है। पूरी सड़क पर दो से तीन फीट के विशालकाय गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को इन गड्ढों की गहराई का बिल्कुल अंदाजा नहीं लग पाता। भारी मालवाहक ट्रकों से लेकर दोपहिया वाहन और ई-रिक्शा (टोटो) हर दिन इन जानलेवा गड्ढों में पलटकर हादसों का शिकार हो रहे हैं।

क्यों हुई इस अहम मार्ग की इतनी दुर्दशा?

गंगा नदी के जरिए माल ढुलाई को बढ़ावा मिलने से तिनटंगा घाट का महत्व काफी बढ़ गया है। हाल ही में कहलगांव और तिनटंगा के बीच मालवाहक जहाजों का परिचालन शुरू हुआ है। इसके कारण इस सड़क पर क्षमता से अधिक भारी वाहनों और ट्रकों का दबाव अचानक बढ़ गया। वहीं, ड्रेनेज (जल निकासी) का कोई पुख्ता इंतजाम न होने और बाढ़-कटाव के बाद सही समय पर मरम्मत न होने से सड़क पूरी तरह उखड़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि पथ निर्माण विभाग कभी-कभार ईंट-रोड़े डालकर महज कागजी खानापूर्ति कर देता है, जो पहली बारिश में ही पानी के साथ बह जाता है।

हादसों का अड्डा बना मार्ग, व्यापार ठप

सड़क की इस जर्जर हालत ने आम जनजीवन और स्थानीय व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थानीय निवासी मुकेश कुमार और उदय बताते हैं कि सड़क खराब होने की वजह से आए दिन टोटो पलट रहे हैं, जिससे महिलाएं और स्कूली बच्चे गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना इस रास्ते से किसी जंग जीतने से कम नहीं है। वहीं, स्थानीय व्यवसायी नवीन कुमार का दर्द है कि जर्जर सड़क के कारण मालवाहक गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पातीं। वाहनों के मेंटेनेंस का खर्च इतना बढ़ गया है कि व्यापार अब बंदी की कगार पर पहुंच चुका है।

चुनावी वादे हुए हवा, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

चुनाव के वक्त विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले स्थानीय जनप्रतिनिधि अब इस बदहाल रास्ते की ओर देखने से भी कतराते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और नेताओं को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन टेंडर और विभागीय प्रक्रियाओं का बहाना बनाकर मामले को लगातार टाला जा रहा है। अब स्थानीय लोगों के सब्र का बांध टूट चुका है। आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन और पथ निर्माण विभाग को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही 14 नंबर सड़क का पक्का नवनिर्माण शुरू नहीं किया गया, तो वे मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर एक बड़ा और उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।