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Up kiran,Digital Desk : अमेरिका में रह रहे या वहां जाने का सपना देख रहे लोगों के लिए, खासकर अगर वे अफगानिस्तान से ताल्लुक रखते हैं, वक्त काफी मुश्किल हो गया है। राजधानी वॉशिंगटन डीसी, जिसे सुरक्षा के लिहाज से सबसे सुरक्षित माना जाता है, वहां हुई एक गोलीबारी ने सब कुछ बदल कर रख दिया है। इस घटना के बाद ट्रंप सरकार ने आव्रजन (Immigration) नियमों को बेहद सख्त कर दिया है।

आखिर हुआ क्या था?

दरअसल, बीते बुधवार को वॉशिंगटन डीसी में एक गोलीबारी हुई, जिसमें नेशनल गार्ड की एक महिला सैनिक की दुखद मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। जांच में सामने आया कि गोली चलाने वाला शख्स कोई और नहीं, बल्कि एक अफगानी मूल का व्यक्ति 'रहमानुल्ला लकनवाल' था। हैरान करने वाली बात यह है कि वह 2021 में अमेरिका आया था और उसे इसी साल वहां शरण (Asylum) मिली थी। यानी जिस देश ने उसे पनाह दी, वहीं उसने हथियार उठा लिया।

ट्रंप सरकार का 'एक्शन मोड'

इस घटना ने राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम को बेहद नाराज कर दिया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया पर साफ शब्दों में कह दिया है, "राष्ट्रपति ट्रंप के विदेश विभाग ने अफगानिस्तान के सभी लोगों को वीजा देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। अमेरिका के लिए अपने देश और अपने लोगों की सुरक्षा से बढ़कर और कोई प्राथमिकता नहीं है।"

इसका मतलब यह है कि अभी किसी भी अफगान नागरिक को अमेरिका का वीजा नहीं मिलेगा। साथ ही, अमेरिका के भीतर भी शरण (Asylum) से जुड़े सभी फैसलों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

अब शुरू होगी 'पुरानी फाइलों' की जांच

सिर्फ नए वीजा रोकना ही काफी नहीं था, प्रशासन ने अमेरिका में पहले से मौजूद अफगान नागरिकों की सुरक्षा जांच (Vetting) फिर से करने का फैसला किया है। अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि देश में रह रहा हर शख्स सुरक्षित हो। जब तक सरकार को पूरी तसल्ली नहीं हो जाती, यह रोक जारी रहेगी।

ग्रीन कार्ड वालों की भी बढ़ीं मुश्किलें

ट्रंप सरकार का गुस्सा सिर्फ अफगानिस्तान तक सीमित नहीं है। इस घटना के बाद 19 अन्य देशों के ग्रीन कार्ड धारकों (स्थायी निवासियों) के दस्तावेजों की भी बारीकी से और सघन जांच करने के आदेश दिए गए हैं।

इन 19 देशों में अफगानिस्तान के अलावा पाकिस्तान के पड़ोसी ईरान, हैती, लीबिया, यमन, सूडान, सोमालिया और वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं। प्रशासन का यह कदम बताता है कि वे सुरक्षा को लेकर अब रत्ती भर भी जोखिम नहीं उठाना चाहते। जाहिर है, सरकार के इस कड़े रुख से वहां रह रहे प्रवासी समुदायों में डर का माहौल पैदा हो गया है कि कहीं उनकी नागरिकता पर खतरा न मंडरा लगे।