Budget 2021 : वित्त मंत्री ने किसानों के लिए खोला खजाना, विपक्ष को दिखाया आईना

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण आज किसानों के लिए खजाने का मुंह खोलने की घोषणा की। वित्तवर्ष  2021-22 में किसानों के लिए 16 लाख 50 हजार करोड़ रु पये की साख सुविधा देने की घोषणा करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि खेती के साथ साथ पशुपालन और मतस्य पालन के बजट में भी भारी वृद्धि की गई है।

नई दिल्ली। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण आज किसानों के लिए खजाने का मुंह खोलने की घोषणा की। वित्तवर्ष  2021-22 में किसानों के लिए 16 लाख 50 हजार करोड़ रु पये की साख सुविधा देने की घोषणा करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि खेती के साथ साथ पशुपालन और मतस्य पालन के बजट में भी भारी वृद्धि की गई है।
Farmer and Finance Minister
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के प्रति किसानों के मन में उपजी शंकाओं को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि चालू खरीफ फसल की सरकारी खरीददारी अब तक सबसे अधिक 1,72,752 करोड़़ रुपये की होने की संभावना है। उन्होंने कांग्रेस समेत तमाम उन विपक्षी नेताओं को आईना भी दिखाया कि उनके शासन काल में किस तरह नाम मात्र की एमएसपी मूल्य पर खरीददारी होती है।

डेढ़ गुणा अधिक मूल्य पर सरकारी खरीददारी होती रहेगी

वित्तमंत्री ने फिर दोहराया कि लागत के डेढ़ गुणा अधिक मूल्य पर सरकारी खरीददारी होती रहेगी। उन्होंने आकड़े देकर स्पष्ट किया कि किस तरह यूपीए के शासनकाल में एमएसपी पर खरीददारी कितनी कम होती थी। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2013-14 के दौरान गेहूं की सरकारी खरीददारी केवल 33, 874 करोड़ रुपये की हुई थी, जबकि मोदी सरकार ने 2019-20 के दौरान 62,802 करोड़ रुपये की गेहूं की सरकारी खरीददारी की।
वर्ष 2020-21 में गेहूं की सरकारी खरीददाारी 75,050 करोड़ रुपये के होने का अनुमान है।  इसी तरह 2013-14 में यूपीए सरकार ने खरीफ फसलों की एमएसपी पर खरीददारी केवल 63,928 करोड़ रुपये की की थी, जबकि 2019-20 में मोदी सरकार ने क1,41,930 करोड़ रुपये की की थी। अब 2020-21 में 1,72,752 करोड़ रुपये की होने की संभावना है।

मोदी सरकार ने 2020-21 में 25,974 करोड़ रुपये की खरीददारी की

वित्तमंत्री ने कहा कि दलहन की खरीददारी में भी मोदी सरकार का रिकार्ड यूपीए की सरकार के मुकाबले काफी अधिक अच्छा है। 2013-14 में यूपीए सरकार ने केवल 90 करोड़ रुपये के दलहन की सरकारी खरीददारी की थी, जबकि मोदी सरकार ने 2020-21 में 25,974 करोड़ रुपये की खरीददारी की। इससे साफ हो जाता है कि एमएसपी के प्रति मोदी सरकार कितनी गंभीर है।

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