Crude Oil Price Hike: अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में भयंकर उबाल, 4% से ज्यादा उछला भाव; क्या आम आदमी पर बढ़ेगा पेट्रोल-डीजल का बोझ?

Crude Oil Price Hike: अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में भयंकर उबाल, 4% से ज्यादा उछला भाव; क्या आम आदमी पर बढ़ेगा पेट्रोल-डीजल का बोझ?

वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से एक बेहद चिंताजनक खबर आ रही है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भयंकर आग लग गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बाद कच्चे तेल का भाव देखते ही देखते 4 प्रतिशत (4%) से ज्यादा उछल गया है। इस ताजा उछाल के बाद वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) एक बार फिर 79.60 डॉलर प्रति बैरल के नजदीक पहुंच गया है। कच्चे तेल में आए इस भयंकर उबाल ने पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं के मन में भी यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या देश में पेट्रोल और डीजल के रेट फिर से बढ़ने वाले हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच ताजा हमलों ने बिगाड़ा ग्लोबल मार्केट का मूड

कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी ताजा सैन्य तनातनी है। वीकेंड के दौरान दोनों देशों के बीच मिसाइल और हवाई हमलों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरान के ठिकानों पर की गई कार्रवाई के बाद ईरान ने भी खाड़ी देशों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के आसपास के क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल परिवहन मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर बढ़ते खतरे ने तेल ट्रेडर्स को पूरी तरह से सतर्क और डरा दिया है, जिसके कारण बाजार में कच्चे तेल की लिवाली (Buying) अचानक बहुत तेज हो गई है।

4% की तूफानी तेजी के साथ $79.60 के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड का भाव

वैश्विक वायदा बाजार में इस तनाव का सीधा असर देखने को मिल रहा है। डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) का भाव करीब 3.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाला ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 4.7% तक की तूफानी तेजी के साथ 79.59 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पिछले महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौतों से बाजार में तेल की सप्लाई सामान्य रहने की जो उम्मीद जगी थी, वह इन ताजा हमलों के बाद पूरी तरह से धूमिल हो गई है। अगर यह तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कीमतें 85 डॉलर के पार भी जा सकती हैं।

क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल और डीजल? जानिए मौजूदा स्थिति

कच्चे तेल में आए इस तगड़े उछाल के बाद भारत के आम बजट और जेब पर असर पड़ना लाजिमी है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (HPCL, BPCL, IOC) ने अभी तक घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों (Retail Fuel Rates) में कोई बदलाव नहीं किया है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है, जबकि मुंबई में पेट्रोल ₹111.12 और डीजल ₹97.78 प्रति लीटर बिक रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल कंपनियां फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के स्थिर होने का इंतजार कर रही हैं, लेकिन अगर क्रूड ऑयल का भाव लंबे समय तक उच्च स्तर पर बना रहता है, तो कंपनियों पर खुदरा दाम बढ़ाने का दबाव बेहद बढ़ जाएगा।

कब तक मिल सकती है कच्चे तेल की महंगाई से राहत

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, इस तिमाही में ग्लोबल ऑयल मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी अनुमान है कि यदि भू-राजनीतिक मोर्चे पर बातचीत या डी-एस्केलेशन (तनाव कम होना) होता है, तो अमेरिकी उत्पादन में बढ़ोतरी और पर्याप्त वैश्विक इन्वेंट्री के कारण कीमतें वापस 70 डॉलर के निचले स्तर पर आ सकती हैं। लेकिन तात्कालिक रूप से, मिडिल ईस्ट का यह भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) भारत सहित पूरी दुनिया के शेयर बाजारों, एविएशन सेक्टर और घरेलू ईंधनों की कीमतों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।

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