आंकड़ों में भारत की डिजिटल पावर: 100 करोड़ पार इंटरनेट कनेक्शन, AI और डेटा सेंटर में आई रिकॉर्ड तोड़ क्रांति
पिछले एक दशक में भारत ने टेक्नोलॉजी और इंटरनेट के क्षेत्र में जो लंबी छलांग लगाई है, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. कभी केवल एक बड़े डिजिटल उपभोक्ता बाजार (Consumer Market) के रूप में पहचाना जाने वाला भारत आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर जैसे भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनकर उभर रहा है.
सरकार द्वारा जारी हालिया फैक्ट शीट के अनुसार, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट पर किए गए निवेश के चलते भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है. आइए विस्तार से समझते हैं भारत की डिजिटल ताकत के ये मुख्य आंकड़े:
1. डिजिटल इंडिया और इंटरनेट क्रांति (Internet & 5G Growth)
साल 2015 में शुरू हुए 'डिजिटल इंडिया' कार्यक्रम ने देश के कोने-कोने तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की नींव रखी. आज इसके आंकड़े बेहद शानदार हैं:
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इंटरनेट कनेक्शन का महा-रिकॉर्ड: साल 2014 में देश में कुल इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या महज 25.15 करोड़ थी, जो 2026 तक बढ़कर 102.86 करोड़ (1 अरब से अधिक) के जादुई आंकड़े को पार कर गई है.
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ब्रॉडबैंड का विस्तार: ब्रॉडबैंड कनेक्शन 2014 के 6.1 करोड़ से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 99.56 करोड़ हो गए हैं.
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सस्ता डेटा, भारी खपत: 2014 में 1 जीबी (GB) डेटा की औसत कीमत ₹269 थी, जो आज दुनिया में सबसे सस्ती दरों में से एक यानी केवल ₹8 से ₹10 प्रति जीबी रह गई है. यही वजह है कि प्रति व्यक्ति मासिक डेटा खपत 61.66 एमबी से बढ़कर 24.01 जीबी तक पहुंच गई है.
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गांव-गांव तक 5G: देश का ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क 2019 के 19.35 लाख रूट किमी से बढ़कर 42.36 लाख रूट किमी हो चुका है, जिससे दुनिया का सबसे तेज 5G नेटवर्क विस्तार भारत में हुआ है और आज 99.9% जिलों में 5G सेवाएं लाइव हैं.
2. सुपरकंप्यूटर और सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता
हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और चिप निर्माण (Chip Manufacturing) के क्षेत्र में भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बनने की ओर अग्रसर है:
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राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): ₹4,500 करोड़ के इस मिशन के तहत देश के प्रमुख शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स है. भारत की स्वदेशी 'परम रुद्र' सुपरकंप्यूटर सीरीज इसमें अहम भूमिका निभा रही है.
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सेमीकंडक्टर इंडिया प्रोग्राम: दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के बजट से शुरू हुए इस मिशन को अब सरकार ने बजट 2026-27 में 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0' के रूप में अपग्रेड किया है.
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लाखों करोड़ की परियोजनाएं: जून 2026 तक लगभग ₹1.64 लाख करोड़ की 12 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1 सेमीकंडक्टर फैब (Fab), 2 कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और 9 अत्याधुनिक पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं.
3. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission)
क्वांटम कंप्यूटिंग और संचार के क्षेत्र में भारत ने तय समय सीमा से काफी पहले बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं:
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सफल नेटवर्क प्रदर्शन: अप्रैल 2023 में ₹6,003.65 करोड़ के बजट के साथ शुरू हुए इस मिशन के तहत भारत ने 1,000 किलोमीटर लंबे सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क का सफल प्रदर्शन किया है. यह ऐतिहासिक सफलता तय समय से 6 वर्ष पहले ही हासिल कर ली गई.
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देश की पहली 'क्वांटम वैली': देश के प्रमुख संस्थानों में 4 विशेष क्वांटम रिसर्च हब बनाए गए हैं जहां 150 से अधिक वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं. इसके साथ ही फरवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के अमरावती में देश की पहली 'क्वांटम वैली' की आधारशिला रखी गई है.
4. AI और डेटा सेंटर सेक्टर में महा-उछाल (AI & Data Centers)
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इंडिया AI मिशन: सरकार द्वारा 2024 में ₹10,300 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ शुरू किए गए इस मिशन के तहत 38,000 से अधिक GPU क्षमता वाली साझा कंप्यूटिंग सुविधा तैयार की जा रही है. वर्तमान में 'AI कोश प्लेटफॉर्म' पर 12,115 से अधिक डेटासेट और 306 AI मॉडल रिसर्च के लिए उपलब्ध हैं.
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स्टार्टअप्स में AI का बोलबाला: मार्च 2026 तक देश में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें से चौंकाने वाले 89% स्टार्टअप्स किसी न किसी रूप में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.
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डेटा सेंटर क्षमता में 4 गुना ग्रोथ: डिजिटल सेवाओं और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के कारण भारत की डेटा सेंटर क्षमता जो साल 2020 में केवल 375 मेगावाट (MW) थी, वह 2025 तक बढ़कर 1,500 मेगावाट तक पहुंच गई है. मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर हब के रूप में उभरे हैं.