यूरोप में भारतीय चावल की ‘अग्निपरीक्षा’, पर 'सुपर फैन' बना यह देश, दे रहा भर-भर कर ऑर्डर

यूरोप में भारतीय चावल की ‘अग्निपरीक्षा’, पर 'सुपर फैन' बना यह देश, दे रहा भर-भर कर ऑर्डर

भारतीय चावल और विशेषकर सुगंधित बासमती की ख्याति पूरी दुनिया में फैली हुई है, लेकिन हाल ही में यूरोपीय बाजारों में भारतीय चावल के निर्यात को लेकर एक बेहद कड़ी और दिलचस्प स्थिति पैदा हो गई है। यूरोप के कड़े क्वालिटी नॉर्म्स और खाद्य सुरक्षा मानकों के बीच जहां एक तरफ भारतीय चावल को हर स्तर पर कड़ी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ यूरोप का ही एक प्रमुख देश भारतीय चावल का ऐसा दीवाना बन चुका है कि वह इसके अंधाधुंध और भर-भर कर आर्डर दे रहा है। फूड ट्रेड और ग्लोबल एग्रीकल्चरल मार्केट में इस वक्त इस देश की दीवानगी चर्चा का विषय बनी हुई है, जिससे भारतीय किसानों और राइस मिलर्स के चेहरों पर बड़ी मुस्कान आ गई है।

कड़े यूरोपीय नियमों के बीच भारतीय चावल की हो रही है कड़ी परीक्षा

यूरोपीय यूनियन (EU) अपने खाद्य उत्पादों को लेकर दुनिया के सबसे सख्त और कड़े नियमों के लिए जाना जाता है। पेस्टिसाइड रेसिड्यू (कीटनाशक अवशेष), फाइटोसाइंटिफिक स्टैंडर्ड और क्वालिटी चेकिंग के मोर्चे पर यूरोपीय देश आयातित अनाजों की बेहद बारीकी से जांच करते हैं। हाल के महीनों में यूरोप द्वारा भारतीय चावल के शिपमेंट पर नियमों को और ज्यादा कड़ा कर दिया गया है, जिसे कृषि और निर्यात क्षेत्र के जानकार एक प्रकार की अग्निपरीक्षा मान रहे हैं। कई मौकों पर कंसाइनमेंट की लंबी जांच और बारकोडिंग-ट्रेसेबिलिटी जैसी जटिल प्रक्रियाओं के कारण निर्यातकों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद भारत के प्रीमियम क्वालिटी चावल ने अपनी बेहतरीन खुशबू, स्वाद और लंबे दानों के दम पर इन तमाम बाधाओं को सफलतापूर्वक पार करना जारी रखा है और यूरोप के बाजारों में अपनी धाक जमाई है।

कौन सा यूरोपीय देश बना भारतीय बासमती का सबसे बड़ा 'सुपर फैन'?

इन तमाम कड़े नियमों और प्रशासनिक अड़चनों के बीच यूरोपीय महाद्वीप का एक देश ऐसा सामने आया है जो भारतीय बासमती और नॉन-बासमती चावल का अंधाधुंध मुरीद बन चुका है। व्यापारिक आंकड़ों के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम (UK) और कुछ हद तक जर्मनी और नीदरलैंड्स जैसे देशों के साथ-साथ विशेष रूप से यूरोपीय संघ के भीतर भारतीय चावल के प्रति दीवानगी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ब्रिटेन और यूरोप के इन बाजारों में रह रहे दक्षिण एशियाई प्रवासियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिक भी भारतीय सुगंधित चावल की गुणवत्ता के कायल हो चुके हैं। इस देश के सुपरमार्केट्स, हाइपरमार्केट्स और थोक बाजारों में भारतीय चावल की डिमांड इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि वहां के आयातकों ने भारत से ताबड़तोड़ बड़े आर्डर देने शुरू कर दिए हैं, जिससे यह देश भारतीय चावल का सबसे बड़ा 'सुपर फैन' बनकर उभरा है।

बंपर डिमांड से भारतीय किसानों और राइस मिलर्स की चमकी किस्मत

यूरोप से मिल रहे इन भर-भर कर ऑर्डर्स का सीधा फायदा भारत के कृषि सेक्टर, खास तौर पर उत्तर भारत के बासमती उत्पादक राज्यों के किसानों और राइस मिल मालिकों को मिल रहा है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के किसानों द्वारा उपजाए जाने वाले प्रीमियम बासमती चावल को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर और लाभकारी दाम मिल रहे हैं। राइस मिलर्स और एक्सपोर्टर्स आधुनिक तकनीक, सोर्टिंग और पैकेजिंग के जरिए यूरोपीय मानकों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। इस बंपर मांग के कारण भारत से होने वाले कृषि निर्यात (Agri-Export) के आंकड़ों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।

भविष्य में ग्लोबल राइस मार्केट और भारत की मजबूत स्थिति का अनुमान

वैश्विक खाद्य बाजार के जानकारों का मानना है कि जिस तरह से यूरोपीय देशों में भारतीय चावल की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है, उससे आने वाले समय में भारत की ग्लोबल मार्केट में स्थिति और अधिक मजबूत होगी। हालांकि कड़े नियम और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ्रेट व लॉजिस्टिक्स की लागत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भारतीय कृषि उत्पादों की क्वालिटी इन सभी बाधाओं पर भारी पड़ रही है। सरकार और कृषि मंत्रालय द्वारा भी निर्यातकों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि वे आधुनिक तकनीक और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स का पालन करते हुए यूरोप के बाजारों में अपनी पकड़ और ज्यादा गहरी कर सकें। आने वाले त्योहारी और कारोबारी सीजन में इन ऑर्डर्स के और अधिक बढ़ने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

मेटा डिस्क्रिप्शन: