फर्जी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर टोल टैक्स में बड़ा खेल, छापेमारी से मचा हड़कंप
भारतीय अर्थव्यवस्था और परिवहन तंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले राजमार्गों (Highways) पर सफर करने वाले आम जनता की जेब पर किस तरह से सुनियोजित तरीके से डाका डाला जा रहा था, इसका एक ऐसा खौफनाक और हैरान करने वाला खुलासा सामने आया है जिसने पूरे देश की प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों और विशेषकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश भर के विभिन्न हिस्सों में एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि देश के करीब 200 टोल प्लाजा पर पूरी तरह से एक गुप्त और फर्जी सॉफ्टवेयर (Fraudulent Software) का इस्तेमाल करके टोल टैक्स के नाम पर मिलने वाली राजस्व राशि में सीधा खेल किया जा रहा था। आरोप है कि फास्टैग (FASTag) और कैश कलेक्शन के जरिए आने वाली कुल रकम में से लगभग 95 प्रतिशत हिस्से की हेराफेरी करके उसे सिस्टम से गायब कर दिया जाता था और सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा था। इस तरह के बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद से केंद्रीय मंत्रालयों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह सिर्फ टैक्स चोरी का मामला नहीं है, बल्कि देश के बुनियादी ढांचे के साथ एक बहुत बड़ा आर्थिक अपराध है।
कैसे काम करता था यह फर्जी सॉफ्टवेयर, टोल बूथों के जरिए सरकार और आम जनता को लगाया जा रहा था करोड़ों का चूना
जब प्रवर्तन निदेशालय और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों की टीमों ने इस फर्जी सॉफ्टवेयर के काम करने के तरीके की बारीकी से जांच की, तो उनके भी होश उड़ गए। आमतौर पर वाहन चालकों जब किसी टोल प्लाजा से गुजरते हैं, तो उनके खाते से फास्टैग के जरिए या नगद भुगतान के रूप में जो टोल टैक्स कटता है, उसका पूरा हिसाब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और संबंधित टोल कंपनियों के सेंट्रल सर्वर पर दर्ज होना चाहिए। लेकिन इन 200 से अधिक टोल प्लाजा पर एक ऐसा मैलवेयर या गुप्त सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया था जो सिस्टम को बाईपास करके असली डेटा को छुपा लेता था और फर्जी एंट्री दिखाता था। इस शातिर तरीके से हर दिन आने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व का बड़ा हिस्सा यानी लगभग 95% रकम सीधे उन भ्रष्ट लोगों और कंपनियों की तिजोरियों में पहुंच रही थी जो इस पूरे सिंडिकेट को चला रहे थे। इस तरह के हाई-टेक वित्तीय फर्जीवाड़े ने यह साबित कर दिया है कि कैसे तकनीक का गलत इस्तेमाल करके देश की व्यवस्था को चकमा दिया जा रहा था। आम नागरिक जो ईमानदारी से अपनी गाड़ियों का टैक्स भरते हैं, उन्हें यह कभी अंदाजा भी नहीं होता होगा कि उनके द्वारा चुकाया गया एक-एक पैसा सरकारी विकास कार्यों में जाने के बजाय कुछ शातिर अपराधियों की जेब में जा रहा है।
ईडी (ED) की देशव्यापी छापेमारी से मचा राजनीतिक और कॉर्पोरेट गलियारों में कोहराम, कई बड़े चेहरे रडार पर
जैसे ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (Prevention of Money Laundering Act - PMLA) के तहत अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए देश भर में एक साथ कई राज्यों के टोल प्लाजा और ऑपरेटर कंपनियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की, वैसे ही कॉर्पोरेट और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। कई बड़ी लॉजिस्टिक्स और टोल कलेक्शन एजेंसियों के दफ्तरों से फर्जी हार्ड ड्राइव, सर्वर क्लोन और भारी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं। जांच अधिकारियों का यह मानना है कि इस घोटाले के तार देश के कई प्रभावशाली लोगों और बड़े सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं, जो पिछले कई सालों से इस तरह की अवैध उगाही को अंजाम दे रहे थे। जैसे-जैसे दस्तावेजों की छंटनी की जा रही है और गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो रहा है, वैसे-वैसे इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले नाम बेनकाब हो सकते हैं। केंद्र सरकार और परिवहन विभाग ने भी इस पूरे मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए यह निर्देश दिए हैं कि दोषी पाए जाने वाली किसी भी कंपनी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आम जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले इस सिंडिकेट पर कसेगा कानूनी शिकंजा, भविष्य के लिए सुरक्षा व्यवस्था हो रही सख्त
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि देश के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पारदर्शिता कितनी ज्यादा जरूरी है। जब देश का नागरिक अपनी मेहनत की कमाई से टैक्स चुकाता है, तो उसकी यह अपेक्षा होती है कि वह पैसा देश के विकास और सड़कों के निर्माण में खर्च होगा, लेकिन जब इस तरह के घोटाले सामने आते हैं तो सिस्टम पर से भरोसा डगमगाने लगता है। ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि देश के सभी टोल प्लाजा के सॉफ्टवेयर और तकनीकी सर्विलांस को पूरी तरह से अपग्रेड किया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की कोई भी वित्तीय हेराफेरी दोबारा न हो सके। देश भर में इस खबर के फैलने के बाद से आम जनता में भारी गुस्सा है और लोग मांग कर रहे हैं कि इन दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो दूसरों के लिए एक मिसाल बन सके। आने वाले हफ्तों में इस जांच के दौरान मिलने वाले नए सबूत और खुलासे यह तय करेंगे कि इस सिंडिकेट के असली सरगना कौन थे और उन्होंने देश को कुल कितने करोड़ रुपये का चूना लगाया है।