विदेशी दबाव में नहीं लिया कोई फैसला', UPI पर MDR को लेकर सरकार की ओर से आई बड़ी सफाई

विदेशी दबाव में नहीं लिया कोई फैसला', UPI पर MDR को लेकर सरकार की ओर से आई बड़ी सफाई

भारतीय अर्थव्यवस्था और डिजिटल पेमेंट के गलियारों में इन दिनों मचे घमासान के बीच सरकार की तरफ से एक बहुत ही स्पष्ट और कड़क बयान सामने आया है, जिसने तमाम तरह की अटकलों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है। देश में यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर (MDR) को लेकर पिछले कुछ दिनों से देश-विदेश के वित्तीय हलकों और तकनीकी दिग्गजों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिन पर अब वित्त मंत्रालय और सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सरकार ने दो टूक शब्दों में यह साफ कर दिया है कि डिजिटल भुगतान के नियमों या एमडीआर से जुड़ा कोई भी नीतिगत फैसला किसी भी प्रकार के विदेशी दबाव में आकर नहीं लिया गया है, बल्कि यह पूरी तरह से देश के राष्ट्रीय हितों, छोटे व्यापारियों की सहूलियत और डिजिटल अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसके साथ ही, देश के सबसे बड़े कर सुधार यानी जीएसटी (GST) के मोर्चे पर भी सरकार ने एक बड़ा बयान देते हुए कर प्रणाली को और अधिक सरल बनाने और आम जनता को राहत देने के संकेत दिए हैं, जिससे पूरे बाजार में एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

यूपीआई पर एमडीआर और विदेशी कंपनियों के दबाव की खबरों की पूरी सच्चाई

हाल ही में ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आ रही थीं जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं और बड़ी अमेरिकी तकनीकी कंपनियां भारत सरकार पर यूपीआई प्लेटफॉर्म्स के लिए एमडीआर शुल्क लागू करने का लगातार दबाव बना रही हैं ताकि वे अपनी कमाई का जरिया पक्का कर सकें। इन अटकलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति पूरी तरह से स्वदेशी मॉडल पर आधारित है और देश के नागरिकों तथा छोटे दुकानदारों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के डिजिटल ट्रांजैक्शन की सुविधा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने यह भी कहा कि विदेशी दबाव जैसी बातें पूरी तरह बेबुनियाद हैं क्योंकि भारतीय आर्थिक नीतियां देश की संसद और जनता के कल्याण को सर्वोपरि रखकर तय की जाती हैं, न कि किसी बाहरी ताकत के इशारे पर। यूपीआई को मुफ्त और सुलभ बनाए रखने के लिए सरकार फिनटेक कंपनियों को वैकल्पिक प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर रही है ताकि देश का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत बना रहे और किसी भी यूजर को पेमेंट करने पर जेब से एक्स्ट्रा पैसा न देना पड़े।

डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर के लिए सरकार का अगला बड़ा विजन

भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वाला देश बन चुका है, जहां सड़क के छोटे रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह क्यूआर कोड के जरिए भुगतान किया जाता है। इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे सरकार की वह दूरदर्शी नीतियां हैं जिन्होंने डेटा की कम लागत और स्मार्टफोन की पहुंच को घर-घर तक पहुंचाया है। एमडीआर के मुद्दे पर सरकार का यह कड़ा रुख इस बात का प्रमाण है कि वह अपने फिनटेक सेक्टर को विदेशी घरानों की मोनोपोली या अनुचित दबाव के आगे झुकने नहीं देगी। इसके बजाय, सरकार देश के स्टार्टअप्स और स्वदेशी पेमेंट गेटवे को बढ़ावा दे रही है ताकि तकनीक के मामले में भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके। सरकार का यह संदेश साफ है कि डिजिटल भुगतान की इस गंगा में हर छोटा व्यापारी और आम ग्राहक बिना किसी बाधा के डुबकी लगा सकता है, और देश के भीतर वित्तीय समावेशन के इस सफर में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक शोषण की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।

जीएसटी सुधारों पर सरकार का बड़ा बयान और कर प्रणाली को सरल बनाने की तैयारी

यूपीआई के साथ-साथ इस उच्चस्तरीय बयान में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी (GST) को लेकर भी सरकार ने अपनी भविष्य की दिशा बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में जीएसटी ने देश के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को एक देश, एक बाजार के रूप में स्थापित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, लेकिन समय के साथ इसमें और अधिक सुधार करने की मांग लगातार उठती रही है। सरकार ने अपने बयान में यह भरोसा दिलाया है कि आने वाले दिनों में जीएसटी के स्लैब को और अधिक तर्कसंगत और सरल बनाया जाएगा ताकि आम आदमी के इस्तेमाल की रोजमर्रा की चीजों पर कर का बोझ कम किया जा सके और व्यापारियों के लिए अनुपालन (Compliance) प्रक्रिया को बेहद आसान बनाया जा सके। कर चोरी रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जो इस्तेमाल सरकार द्वारा किया जा रहा है, उससे कर संग्रह में लगातार रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा फायदा देश के विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को मिल रहा है।