सेंसेक्स में 450 अंकों का तूफानी उछाल, जानिए अब आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल
भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के निवेशकों के लिए पिछले कुछ कारोबारी सत्र किसी रोलरकोस्टर राइड से कम नहीं रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और घरेलू बाजार के नकारात्मक रुझानों के चलते हाल ही में निवेशकों के देखते-देखते लगभग 9 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम पूंजी डूब गई थी, जिससे बाजार में हाहाकार मच गया था। लेकिन इसके ठीक बाद दलाल स्ट्रीट से एक बेहद राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है, जहां बाजार ने गोता लगाने के बाद एक बार फिर से जोरदार वापसी की है। आज के कारोबारी सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) करीब 450 अंकों की मजबूती के साथ हरे निशान पर कारोबार करता नजर आया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी मजबूत बढ़त बनाने में कामयाब रहा। इस अचानक आए तेज उछाल के बाद से निवेशकों के चेहरे पर एक बार फिर से मुस्कान लौट आई है और वे यह जानने के लिए बेताब हैं कि क्या यह तेजी एक स्थाई सुधार की शुरुआत है या फिर आने वाले दिनों में बाजार की चाल फिर से बदल सकती है। आइए इस पूरे आर्थिक घटनाक्रम, बाजार में आए इस अचानक बदलाव के कारणों और विशेषज्ञों के अनुमानों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
आखिर क्यों डूबे थे निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये और बाजार में क्यों मचा था भूचाल?
पिछले कुछ दिनों के दौरान घरेलू शेयर बाजार में जिस तरह की भारी गिरावट देखने को मिली थी, उसने निवेशकों की रातों की नींद उड़ा दी थी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर रुख, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और कंपनियों के तिमाही नतीजों में मिक्स्ड संकेतों के कारण बाजार पर चौतरफा दबाव बना हुआ था। इस बिकवाली के आंधी-तूफान में निवेशकों की संपत्ति यानी मार्केट कैपिटलाइजेशन में से करीब 9 लाख करोड़ रुपये पलक झपकते ही स्वाहा हो गए थे। बाजार के जानकारों का यह मानना है कि जब वैश्विक स्तर पर डर का माहौल बनता है, तो भारतीय बाजार भी उसके प्रभाव से अछूते नहीं रह पाते, और यही वजह थी कि ब्लू-चिप शेयरों से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों तक में भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला था।
सेंसेक्स में 450 अंकों के इस शानदार उछाल के पीछे कौन से बड़े आर्थिक कारक हैं जिम्मेदार?
भारी गिरावट के बाद बाजार में अचानक आई इस रिकवरी के पीछे कई सकारात्मक घरेलू और वैश्विक कारण काम कर रहे हैं। बैंकिंग, आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर के दिग्गज शेयरों में आई बॉटम-फिशिंग (सस्ते दामों पर लिवाली) के कारण निवेशकों ने जोरदार खरीदारी की है। इसके अलावा, भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी फंडामेंटल्स (Fundamentals) अभी भी बेहद मजबूत बने हुए हैं और देश का औद्योगिक उत्पादन तथा खुदरा महंगाई के आंकड़े नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा एक बार फिर से मजबूत हुआ है। विदेशी निवेशकों ने भी निचले स्तरों पर बिकवाली रोकने के बाद चुनिंदा शेयरों में नए सिरे से निवेश करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी को एक ठोस सहारा मिला है और सूचकांक 450 से अधिक अंकों की छलांग लगाने में सफल रहे हैं।
आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? निवेशकों को अब क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
शेयर बाजार के विश्लेषकों और वित्तीय सलाहकारों का यह अनुमान है कि हालांकि बाजार ने आज एक बेहतरीन रिकवरी दिखाई है, लेकिन निवेशकों को अभी भी बहुत अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। वैश्विक बाजारों से आने वाले नए संकेत, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आने वाले दिनों में आने वाले कॉर्पोरेट आंकड़े बाजार की अगली दिशा तय करेंगे। यदि आप एक लॉन्ग-ترم (Long-term) निवेशक हैं, तो बाजार में इस प्रकार के उतार-चढ़ाव के दौरान घबराने के बजाय अच्छी कंपनियों के शेयरों में एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश जारी रखना फायदेमंद साबित हो सकता है। वहीं, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को तकनीकी स्तरों का ध्यान रखते हुए ही स्टॉप-लॉस के साथ ट्रेड करने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि आने वाले हफ्तों में बाजार में वोलेटिलिटी (उतार-चढ़ाव) बनी रहने की पूरी संभावना है।
भारतीय शेयर बाजार का उज्ज्वल भविष्य और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी
पिछले कुछ वर्षों में देश के खुदरा निवेशकों (Retail Investors) ने जिस प्रकार म्यूचुअल फंड्स और सीधे शेयरों में निवेश करके भारतीय शेयर बाजार की ताकत को बढ़ाया है, वह वाकई सराहनीय है। 9 लाख करोड़ रुपये डूबने के झटके के बाद भी जिस तेजी से बाजार ने खुद को संभाला है, वह यह साबित करता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां के शेयर बाजार में अब इतनी गहराई और मजबूती आ चुकी है कि वह हर बड़े झटके को झेलने में सक्षम है। आने वाले समय में जैसे-जैसे त्योहारी सीजन और कॉर्टरली अर्निंग्स के आंकड़े सामने आएंगे, बाजार की यह चाल और अधिक स्पष्ट होती जाएगी। निवेशकों के लिए यही मंत्र सबसे बेहतर है कि वे अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय मजबूत बुनियादी और फंडामेंटल वाली कंपनियों पर अपना भरोसा बनाए रखें।