चीनी थोड़ी सस्ती, लेकिन खुशी की वजह नहीं! सरसों तेल ने बढ़ा दी रसोई की चिंता
त्योहारों की शुरुआत के साथ ही मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का गणित गड़बड़ा गया है। पकवानों और मिठाइयों के लिए सबसे जरूरी दो चीजें यानी मीठा और कुकिंग ऑयल आम उपभोक्ता की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। हालांकि हाल के दिनों में मिठास के भाव में मामूली नरमी आई है लेकिन यह अब भी साठ रुपये प्रति किलो से ऊपर टिकी हुई है। दूसरी तरफ कड़वा तेल दो सौ का स्तर पार करके आम उपभोक्ता को लगातार परेशान कर रहा है। ऐसे में हर गृहणी और परिवार यह जानने को उत्सुक है कि इस दोहरी महंगाई से उन्हें कब निजात मिलेगी।
खुदरा बाजार में हल्की नरमी के बावजूद चीनी के दाम ऊंचे
खुले बाजार में चीनी के भाव पिछले सप्ताह दर्ज 65.08 रुपये प्रति किलो से कुछ गिरकर 62.57 रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं। इस तरह खुदरा मूल्य में 3.85 रुपये की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद बीते वर्षों की तुलना में यह स्तर काफी ज्यादा बना हुआ है।
आधिकारिक सूचना के अनुसार शुक्रवार को दर्ज भाव उनसठ रुपये प्रति किलो रहा जो पिछले वर्ष के मुकाबले चौदह रुपये अधिक है। याद दिला दें कि पिछले साल इसी अवधि के दौरान चार सितंबर को उपभोक्ताओं को एक किलो के लिए केवल पैंतालीस रुपये चुकाने पड़ रहे थे।
आपूर्ति सुधारने और मुनाफाखोरी रोकने के लिए शुल्क मुक्त आयात
घरेलू मांग को पूरा करने और बाजार में स्थिरता लाने के उद्देश्य से नीति निर्माताओं ने विदेशी खरीद पर सीमा शुल्क समाप्त कर दिया है। इसके तहत दस लाख टन तक आयात को टैक्स छूट दी गई है। इस कदम से थोक और परचून दोनों बाजारों में सप्लाई सुधरने की संभावना है। इसके साथ ही प्रशासन जमाखोरों पर भी कड़ी निगरानी रख रहा है ताकि कृत्रिम किल्लत पैदा न की जा सके।
दो सौ के पार टिका सरसों का तेल
खाद्य तेल के मोर्चे पर भी आम आदमी को कोई राहत नहीं मिल रही है। पिछले एक माह से सरसों तेल के भाव दो सौ एक रुपये प्रति किलो के आसपास जमे हुए हैं। पिछले साल यही तेल एक सौ सत्तासी रुपये प्रति किलो में उपलब्ध था। लगातार एक महीने से इसमें स्थिरता तो बनी है मगर भाव नीचे नहीं आ रहे जिससे आम रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
उपभोक्ताओं को कब तक मिल सकती है राहत
बाजार जानकारों का मानना है कि गन्ने की नई उपज आने तक यानी अक्टूबर माह से पहले चीनी के भाव में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि खाद्य तेल के मोर्चे पर राहत थोड़ी जल्दी मिल सकती है। राजस्थान से नई तिलहन फसल मंडियों में पहुंचते ही अगले कुछ सप्ताह में सरसों तेल की दरों में नरमी आने की पूरी संभावना व्यक्त की जा रही है।