ट्रंप ने मानी हार! ईरान ने अमेरिका को थमाई शर्तों की लिस्ट, क्या अब खुलेगा होर्मुज का दरवाजा और भारत क्यों खुश है?
मध्य पूर्व की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे लंबे गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नरमी के संकेत सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इस संघर्ष में अपने कड़े रुख से थोड़ा पीछे हटते हुए अप्रत्यक्ष रूप से अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव किया है। दूसरी तरफ, ईरान ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए अमेरिका के सामने अपनी मांगों और शर्तों की एक लंबी फेहरिस्त रख दी है। दुनिया भर की नजरें इस समय दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग पर टिकी हैं, और इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर भारत पर भी पड़ने वाला है।
ट्रंप की रणनीति में बदलाव और ईरान की चौंकाने वाली शर्तें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को कम करने और बिना किसी व्यापक समझौते के रास्ते तलाशने के संकेतों ने वैश्विक राजनीति को गरमा दिया है। ट्रंप का मुख्य उद्देश्य किसी तरह वैश्विक बाजार में ईंधन और तेल की कीमतों को स्थिर करना है, जिसके लिए उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का रास्ता खुला चाहिए। इसके विपरीत, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इतनी आसानी से झुकने वाला नहीं है। तेहरान ने अमेरिका के सामने आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने, फारस की खाड़ी से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी और युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई जैसी कई कड़ी शर्तें रख दी हैं।
क्या वाकई खुलेगा रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वह बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे वैश्विक कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस रास्ते के बंद होने या बाधित रहने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया था और तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। ट्रंप प्रशासन इस मार्ग को सुरक्षित और चालू कराने के लिए कूटनीतिक दबाव बना रहा है, ताकि घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके। हालांकि, ईरान की शर्तें इतनी आसान नहीं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और मध्यस्थता के प्रयासों के कारण यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बातचीत के जरिए इस रास्ते को खोलने को लेकर कोई ठोस सहमति बन सकती है।
भारत के लिए क्यों बेहद राहत भरी और खुशी की खबर है यह घटनाक्रम
भारत के दृष्टिकोण से होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना और अमेरिका-ईरान तनाव का कम होना किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, और इस रास्ते के बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा था। यदि होर्मुज का दरवाजा पूरी तरह खुल जाता है, तो कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में स्थिरता आएगी, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, इस रूट के सुचारू होने से भारतीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही भी सुरक्षित हो जाएगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और आयात-निर्यात को बड़ा बल मिलेगा।