रोबोटैक्सी की दस्तक से हिली Uber, निकाले जाएंगे 10% कर्मचारी! चौंकाने वाला फैसला...
ग्लोबल मोबिलिटी और कैब शेयरिंग की दुनिया में एक ऐसा बड़ा भूचाल आ गया है जिसने पूरी कॉर्पोरेट दुनिया और तकनीकी जगत को हिलाकर रख दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी राइड-शेयरिंग कंपनियों में शुमार उबर (Uber) को लेकर एक ऐसी सनसनीखेज और चिंताजनक खबर सामने आई है जिसने लाखों कर्मचारियों की रातों की नींद उड़ा दी है। आधुनिक तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में अब इंसानी नौकरियों पर बहुत बड़ा खतरा मंडराने लगा है, जिसका ताजा उदाहरण उबर द्वारा लिया गया यह कड़ा फैसला है। मीडिया रिपोर्ट्स और अंदरूनी सूत्रों से मिल रही जानकारियों के अनुसार, बाजार में रोबोटैक्सी (Robotaxi) यानी बिना ड्राइवर के चलने वाली स्वायत्त कारों की तेजी से होती हुई दस्तक ने उबर के व्यावसायिक मॉडल को अंदर से हिलाकर रख दिया है। इसी भारी आर्थिक दबाव और भविष्य की व्यावसायिक रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने अपने कुल कार्यबल का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 3300 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना लिया है। कोविड-19 महामारी के दौर के बाद से यह उबर कंपनी के इतिहास में लिया गया अब तक का सबसे बड़ा छंटनी (Layoffs) का फैसला माना जा रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर लेबर मार्केट और टेक सेक्टर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
जब इंसानी ड्राइवरों और कर्मचारियों पर भारी पड़ी रोबोटैक्सी की तकनीक, भविष्य के मोबिलिटी मार्केट में बदल रहा समीकरण
सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि दुनिया की इतनी बड़ी और मुनाफा कमाने वाली कंपनी को अपने हजारों कर्मचारियों को एक झटके में बेरोजगार करना पड़ रहा है। तकनीकी जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में टेस्ला, वेमो (Waymo) और अन्य बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने रोबोटैक्सी और सेल्फ-ड्राइविंग कारों के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। इन स्वायत्त वाहनों को न तो वेतन देने की आवश्यकता होती है, न ही इन्हें किसी प्रकार के विश्राम या छुट्टियों की जरूरत पड़ती है, और ये चौबीसों घंटे बिना थके अपनी सेवाएं दे सकते हैं। इस आधुनिक और कम लागत वाली तकनीक के आने से पारंपरिक कैब कंपनियों के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं और उन्हें अपने व्यावसायिक अस्तित्व को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं। उबर जैसी कंपनियों के लिए यह एक बहुत बड़ा रणनीतिक संकट बन चुका है, क्योंकि यदि वे समय के साथ इस नई तकनीक को नहीं अपनाती हैं, तो वे प्रतियोगिता से बाहर हो जाएंगी, और यदि वे इसे अपनाती हैं, तो उन्हें अपने विशाल मानव संसाधन नेटवर्क को कम करना पड़ेगा। इसी हकीकत के चलते कंपनी प्रबंधन को यह कड़वा घूंट पीते हुए हजारों कर्मचारियों की छंटनी का यह ऐतिहासिक और दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय लेना पड़ा है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि भविष्य का परिवहन पूरी तरह से मशीनों और एआई के हाथों में जाने वाला है।
3300 कर्मचारियों के घरों में छाया अंधेरा, कोविड के बाद की सबसे बड़ी छंटनी से कॉर्पोरेट जगत में मचा कोहराम
इस बड़े पैमाने पर होने वाली छंटनी से सीधे तौर पर प्रभावित होने वाले 3300 कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए यह किसी वज्रपात से कम नहीं है। जब साल 2020 में कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया था, तब तमाम कंपनियों ने अपनी लागत कम करने के लिए बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को निकाला था, लेकिन महामारी का वह दौर बीत जाने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि अब स्थितियां सामान्य हो जाएंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, इस बार का संकट किसी महामारी के कारण नहीं बल्कि तकनीकी क्रांति (Technological Disruption) के कारण आया है, जो यह दर्शाता है कि भविष्य में एआई और ऑटोमेशन किस प्रकार इंसानी नौकरियों को लीलने के लिए तैयार बैठा है। उबर के इस फैसले के बाद से दुनिया भर की टेक यूनियनों और श्रम संगठनों ने चिंता व्यक्त करनी शुरू कर दी है और वे यह मांग कर रहे हैं कि सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे तकनीकी बदलावों के कारण अचानक सड़क पर आने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जा सके। कॉर्पोरेट गलियारों में इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि आने वाले दिनों में न केवल उबर बल्कि अन्य राइड-हailing और डिलीवरी कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल सकती हैं, जिससे आने वाले समय में व्हाइट कॉलर और ऑपरेशंस से जुड़ी नौकरियों पर संकट और अधिक गहरा सकता है।