ईरान-अमेरिका युद्ध से दुनिया भर में तेल का हाहाकार! कई देशों में दोगुने हुए दाम
ईरान और अमेरिका के बीच भड़के सीधे सैन्य संघर्ष की मार अब पूरी दुनिया के आम जनजीवन पर पड़ने लगी है। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) बेहद गहरा गया है, जिसके चलते दुनिया के कई बड़े और छोटे देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। इस युद्ध की तपिश से खुद महाशक्ति अमेरिका भी नहीं बच सका है, जहां ईंधन के दाम करीब डेढ़ गुना तक बढ़ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की इस भयंकर महंगाई के बीच अगर भारत की बात करें, तो यहां के नागरिकों को वैश्विक तुलना में अब भी बहुत बड़ी राहत मिली हुई है। दुनिया के कई मुल्कों में जहां तेल की कीमतें 100 से 150 फीसदी तक उछल चुकी हैं, वहीं भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में बेहद मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
छोटे देशों पर टूटी महंगाई की सबसे बड़ी गाज, लाओस और फिजी में हाहाकार
इस वैश्विक युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का सबसे घातक असर लाओस और फिजी जैसे छोटे और विकासशील देशों पर पड़ा है। इन देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है क्योंकि यहां डीजल की कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक हो चुकी हैं। 'ग्लोबल पेट्रोल प्राइस' द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, लाओस में डीजल के दामों में करीब 150 प्रतिशत की रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, फिजी में भी डीजल के रेट 110 प्रतिशत तक उछल चुके हैं। इसके अलावा म्यांमार में पेट्रोल की कीमतें 87.6 प्रतिशत और डीजल 85.6 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। तेल उत्पादक क्षेत्र होने के बावजूद यूएई (UAE) में पेट्रोल 64.4 प्रतिशत और डीजल 71.8 प्रतिशत महंगा हुआ है, जबकि मलेशिया में पेट्रोल के दाम 54.3 और डीजल के 62.9 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
अमेरिका, चीन और हमारे पड़ोसी देशों का क्या है हाल?
इस युद्ध की शुरुआत के बाद से महाशक्ति अमेरिका और भारत के पड़ोसी देशों में भी ईंधन की कीमतें अनियंत्रित हो चुकी हैं। पाकिस्तान में इस दौरान पेट्रोल की कीमतों में 47.9 प्रतिशत और डीजल में 38.10 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे श्रीलंका में पेट्रोल के दाम 45.6 प्रतिशत और डीजल के दाम 48 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। युद्ध में सीधे तौर पर शामिल अमेरिका में भी पेट्रोल 40.6 प्रतिशत और डीजल 40.5 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। भारत के पड़ोसी देश नेपाल की स्थिति पर गौर करें तो वहां पेट्रोल 38.2 प्रतिशत और डीजल 58.5 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन भी इस संकट से अछूता नहीं है, वहां पेट्रोल के दाम 26.2 प्रतिशत और डीजल के दाम 28.6 प्रतिशत बढ़ चुके हैं, जबकि बांग्लादेश में पेट्रोल 20.8 प्रतिशत और डीजल 15 प्रतिशत तक महंगा हुआ है।
वैश्विक महा-संकट के बीच भारत की स्थिति बेहद मजबूत और सुरक्षित
दुनिया भर में मचे इस बड़े तेल संकट के बीच भारत की स्थिति बेहद मजबूत और सराहनीय बनी हुई है। जहां अन्य देशों के नागरिक तेल के लिए दोगुने पैसे चुका रहे हैं, वहीं भारत में इस युद्ध काल के दौरान पेट्रोल में केवल 7.4 प्रतिशत और डीजल में महज 8.3 प्रतिशत की ही मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, घरेलू बाजार में मई के महीने के दौरान ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी जरूर की थी, लेकिन वैश्विक आंकड़ों को देखते हुए भारतीय बाजार में यह वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सरकार और देश की तेल कंपनियों के बेहतर कूटनीतिक प्रबंधन के कारण भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका सीधा और बड़ा बोझ नहीं पड़ने दिया गया है।
देश के प्रमुख महानगरों में आज क्या हैं पेट्रोल और डीजल के ताजा भाव?
भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (HPCL, BPCL और IOCL) ने आज सुबह देश के सभी राज्यों और महानगरों के लिए पेट्रोल और डीजल के नए रेट अपडेट कर दिए हैं। देश के चार बड़े महानगरों में आज ईंधन की कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर (City) | पेट्रोल प्रति लीटर (₹) | डीजल प्रति लीटर (₹) |
| दिल्ली (Delhi) | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई (Mumbai) | 111.21 | 97.83 |
| कोलकाता (Kolkata) | 113.51 | 99.82 |
| चेन्नई (Chennai) | 107.77 | 99.55 |