बिहार की नीतीश सरकार में शिक्षा मंत्री ने दिया इस्तीफा, लगे हैं ये गंभीर आरोप

मेवा लाल उस समय वहां के कुलपति थे। मंत्री पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर बवाल मचा हुआ था। 

पटना। बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने गुरुवार को मंत्री पद का प्रभार संभालने के थोड़ी देर बाद ही इस्तीफा दे दिया। उन पर भागलपुर के सबौर कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति में गड़बड़ी करने का गंभीर आरोप है। मेवा लाल उस समय वहां के कुलपति थे। मंत्री पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर बवाल मचा हुआ था।

education minister resigns

मेवालाल की पत्नी की मौत पर रिटायर्ड IPS ने सवाल उठाए

मेवालाल की पत्नी की 27 मई 2019 को मौत हो गई थी। VRS ले चुके IPS अमिताभ कुमार दास ने DGP एसके सिंघल को खत लिखकर मांग की थी कि मेवालाल की पत्नी की झुलसकर हुई मौत के मामले में SIT से जांच कराई जाए।

कुछ देर पहले क्या कहा था मंत्री ने

मेवा लाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। कहा कि मेरे ऊपर कोई चार्जशीट नहीं है। उन्होंने कहा कि पत्नी की मौत के लिए मुझे जिम्मेदार बताने वालों पर मानहानि का मुकदमा करेंगे। जिस आईपीएस अधिकारी ने यह आरोप लगाए हैं, उनके खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि का केस कर रहा हूं। मेरे खिलाफ कोई तथ्य नहीं है जिसकी जांच की बात हो।

बता दें कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार मेवालाल पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को उठा रहे हैं। आज भी उन्होंने इस मसले पर ट्वीट कर हमला बोला है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा हत्या और भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में IPC की 409, 420, 467, 468, 471 और 120B धारा के तहत आरोपी मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाने से बिहारवासियों को क्या शिक्षा मिलती है?

इससे पहले गुरुवार की सुबह मेवालाल ने पदभार ग्रहण किया। पद संभालने  के बाद मेवालाल ने कहा कि शिक्षा में बदलाव के लिए सरकार ने जो-जो कदम उठाया है उसे आगे बढ़ाएंगे। शिक्षा में बदलाव को लेकर रोडमैप बनाकर काम होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि  शिक्षा में गुणात्मक सुधार हमारी प्राथमिकता होगी। सिलेबस में जरुरत के हिसाब से संशोधन या बदलाव किया जाएगा।

मेवालाल पर हैं ये आरोप

तारापुर से निर्वाचित जेडीयू विधायक डॉ मेवालाल चौधरी को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया है। राजनीति में आने से पहले वर्ष 2015 तक वह भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति थे। वर्ष 2015 में सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए। इसके बाद जदयू से टिकट लेकर तारापुर से चुनाव लड़े और जीत गए। लेकिन, चुनाव जीतने के बाद डॉ चौधरी नियुक्ति घोटाले में आरोपित किए गए। कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति घोटाले का मामला सबौर थाने में वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था। इस मामले में विधायक ने कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली थी।

पत्नी की डेथ केस में पूछताछ की मांग

मेवालाल चौधरी की पत्नी स्व. नीता चौधरी राजनीति में काफी सक्रिय रही थीं। वह जदयू के मुंगेर प्रमंडल की सचेतक भी थीं। 2010-15 में तारापुर से विधायक चुनी गयीं। वर्ष 2019 में गैस सिलेंडर से लगी आग में झुलसने से उनकी मौत हो गयी थी। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी की पत्नी की मौत के मामले में उनसे पूछताछ की मांग की है। इसके लिए उन्होंने डीजीपी एसके सिंघल को पत्र लिखा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *