आमिर खान की बढ़ी मुश्किलें! ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े फर्जीवाड़े में कोर्ट का समन, 18 सितंबर को होना होगा पेश

आमिर खान की बढ़ी मुश्किलें! ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े फर्जीवाड़े में कोर्ट का समन, 18 सितंबर को होना होगा पेश

बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' आमिर खान एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। सलमान खान के बाद अब अभिनेता आमिर खान को भी एक मामले में कोर्ट की तरफ से नोटिस जारी किया गया है। यह पूरा मामला साल 2019 में ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए कथित तौर पर नकली सामान बेचे जाने और विज्ञापनों की प्रामाणिकता से जुड़ा हुआ है। कोटा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आमिर खान समेत तीन लोगों को समन भेजा है और आगामी 18 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह पूरा कानूनी विवाद साल 2019 का है। कोटा के एक अधिवक्ता ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म स्नैपडील (Snapdeal) के जरिए 'वुडलैंड' (Woodland) ब्रांड का एक बेल्ट और वॉलेट ऑर्डर किया था। जब सामान डिलीवरी के बाद उनके घर पहुंचा और उन्होंने उसकी प्रामाणिकता की जांच के लिए अधिकृत शोरूम से संपर्क किया, तो पता चला कि वह उत्पाद कथित तौर पर नकली था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस जांच और अंतिम रिपोर्ट के बाद यह मामला कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता आयोग) की चौखट तक पहुंच गया।

स्नैपडील के संस्थापकों के साथ आमिर खान भी बने प्रतिवादी

उपभोक्ता अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान धारा 35 के तहत संशोधित परिवाद पेश किया गया। इसमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्नैपडील के कुणाल बहल और रोहित बंसल के साथ-साथ कंपनी के पूर्व ब्रांड एंबेसडर रहे अभिनेता आमिर खान को भी प्रतिवादी (Party) बनाया गया है। चूंकि उस दौरान आमिर खान इस ब्रांड और प्लेटफॉर्म के विज्ञापनों में मुख्य चेहरा हुआ करते थे, इसलिए उपभोक्ता अदालत ने उन्हें भी जवाब तलब किया है। अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 18 सितंबर को अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट में पेश होने को कहा है।

सेलिब्रिटी विज्ञापनों की जवाबदेही पर फिर छिड़ी बहस

इस कानूनी नोटिस के सामने आने के बाद एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या किसी उत्पाद या प्लेटफॉर्म का विज्ञापन करने वाला सेलिब्रिटी सिर्फ उसका चेहरा होता है, या फिर उपभोक्ता के ठगे जाने पर उसकी भी नैतिक और कानूनी जवाबदेही बनती है? शिकायतकर्ता का तर्क है कि विज्ञापनों के जरिए जनता बड़े सितारों पर भरोसा करके खरीदारी करती है, ऐसे में सेलिब्रिटी को भी प्रचारित की जाने वाली सेवाओं की विश्वसनीयता की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बहरहाल, 18 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं कि इस मामले में कोर्ट का अगला रुख क्या रहता है।

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