जेसन की फिल्म का नहीं करेंगे प्रमोशन, पिता की राजनीतिक पहचान को बीच में नहीं लाना चाहते अभिनेता
साउथ सिनेमा के महानायक और हाल ही में अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी की शुरुआत करने वाले थलपति विजय के घर से एक बहुत ही हैरान करने वाली और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने तमिल फिल्म इंडस्ट्री से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है। अपनी फिल्मों की रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा देने वाले थलपति विजय इस बार अपनी किसी फिल्म को लेकर चर्चा में नहीं हैं, बल्कि उनके बेटे जेसन संजय (Jason Sanjay) के निर्देशन में बनने वाली आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'सिग्मा' (Sigma) को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। खबरों के अनुसार, थलपति विजय ने यह स्पष्ट निर्णय लिया है कि वे अपने बेटे जेसन संजय की इस फिल्म का किसी भी प्रकार से प्रत्यक्ष रूप से प्रचार या प्रमोशन नहीं करेंगे। इसके पीछे की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि जेसन संजय अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी खुद की एक अलग पहचान बनाना चाहते हैं, और वे यह बिल्कुल नहीं चाहते कि उनके पिता की भारी-भरकम राजनीतिक पहचान या सुपरस्टारडम का साया उनकी पहली फिल्म की सफलता पर पड़े। पिता और पुत्र के बीच आपसी सहमति से लिया गया यह फैसला इस समय दक्षिण भारतीय सिनेमा गलियारों में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है, और हर कोई जेसन संजय के इस स्वतंत्र और आत्मविश्वासी रुख की सराहना कर रहा है।
जेसन संजय का स्वतंत्र सिनेमाई सफर और पिता की राजनीतिक पहचान से दूरी रखने की वजह
जब भी सिनेमा जगत में किसी बड़े स्टार का बेटा या बेटी कदम रखता है, तो इंडस्ट्री में गॉडफादर के होने का फायदा मिलने की बात सबसे पहले कही जाती है, लेकिन थलपति विजय के बेटे जेसन संजय इस रूढ़िवादी सोच से बिल्कुल अलग रास्ता चुनते नजर आ रहे हैं। जेसन ने निर्देशन के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया है और वे लाइमलाइट से दूर रहकर अपनी पहली फिल्म 'सिग्मा' की शूटिंग और मेकिंग पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। थलपति विजय ने हाल ही में सक्रिय राजनीति में कदम रखा है और अपनी राजनीतिक पार्टी 'तमिझगा वेत्री कड़गम' (TVK) के जरिए चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके कारण उनके राजनीतिक विरोधी और मीडिया की नजरें हर समय उन पर टिकी रहती हैं। ऐसे में यदि थलपति विजय अपने बेटे की फिल्म के प्रचार में आगे आते हैं, तो अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग या विवाद फिल्म से जुड़ सकते हैं, जो जेसन संजय के शुरुआती करियर के लिए ठीक नहीं होता। यही कारण है कि जेसन ने खुद यह इच्छा जताई है कि वे अपने पिता के स्टारडम या राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल किए बिना अपनी कला और कहानी के दम पर दर्शकों के दिलों में जगह बनाना चाहते हैं, जो एक युवा निर्देशक के रूप में उनकी परिपक्वता को दर्शाता है।
'सिग्मा' फिल्म से जुड़ी उम्मीदें और निर्देशक के रूप में जेसन संजय का बड़ा इम्तिहान
जेसन संजय ने अपनी पढ़ाई विदेशों में फिल्म मेकिंग और निर्देशन के क्षेत्र में ही पूरी की है, और उनके पास सिनेमा को आधुनिक तकनीकों के साथ पर्दे पर उतारने का हुनर है। लाइका प्रोडक्शन्स जैसे बड़े बैनर के तहत बनने वाली फिल्म 'सिग्मा' को लेकर युवाओं के बीच खासा क्रेज देखा जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार होगा जब थलपति विजय का परिवार कैमरे के पीछे किसी नए टैलेंट को लॉन्च कर रहा है। हालांकि फिल्म में मुख्य कलाकार कौन होंगे और इसकी कहानी किस जॉनर पर आधारित होगी, इसे लेकर अभी निर्माताओं ने पर्दा पूरी तरह से नहीं उठाया है, लेकिन इसकी भव्यता और मेकिंग स्टाइल को लेकर चर्चाएं अभी से शुरू हो चुकी हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि भले ही थलपति विजय इस फिल्म का खुलकर प्रचार न करें, लेकिन एक सुपरस्टार के पिता का आशीर्वाद और अनुभव हमेशा जेसन के साथ रहेगा। इसके बावजूद, बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को अपने दम पर ही चलना होगा और दर्शकों की कसौटी पर खरा उतरना होगा, जो जेसन संजय के लिए एक बड़ा इम्तिहान साबित होने वाला है।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में स्टार किड्स का बदलता दौर और लीक से हटकर सोचने का अंदाज
पिछले कुछ वर्षों में साउथ सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक स्टार किड्स के लॉन्च को लेकर लोगों की सोच में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां अब दर्शक सिर्फ किसी बड़े स्टार के बेटे होने भर से किसी को स्वीकार नहीं करते, बल्कि उनके अभिनय या निर्देशन में असल दम देखना चाहते हैं। जेसन संजय का यह फैसला कि वे अपने पिता की राजनीतिक पहचान और स्टार पावर का बैसाखी के रूप में इस्तेमाल नहीं करेंगे, इस बदलते दौर का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। थलपति विजय ने भी एक पिता के रूप में अपने बेटे के इस फैसले का पूरा सम्मान किया है और वे पर्दे के पीछे रहकर उसे एक मजबूत नैतिक समर्थन दे रहे हैं। यह कदम न केवल जेसन संजय को एक स्वतंत्र और संजीदा फिल्ममेकर के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि यह भी साबित करेगा कि सच्ची प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए किसी बड़े राजनीतिक या फिल्मी सहारे की जरूरत नहीं होती, बल्कि लगन और कड़ी मेहनत ही असली पहचान बनाती है।