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Up kiran,Digital Desk : यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की हालिया भारत यात्रा के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा झटका लगा है। संयुक्त अरब अमीरात ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट के संचालन से जुड़ा अहम समझौता रद्द कर दिया है। इस फैसले को भारत-यूएई के मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों और पाकिस्तान के घटते प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अगस्त 2025 से इस डील पर बातचीत चल रही थी, लेकिन अब अबू धाबी ने इससे हाथ खींच लिया है।

अचानक क्यों पीछे हटा यूएई?
पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई ने इस प्रोजेक्ट में रुचि खो दी थी। एयरपोर्ट संचालन के लिए उपयुक्त स्थानीय साझेदार न मिल पाना भी बड़ी वजह बताई जा रही है। आधिकारिक तौर पर भले ही इसे तकनीकी और व्यावसायिक कारण बताया जा रहा हो, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे भारत के साथ यूएई की बढ़ती नजदीकी से जोड़कर देखा जा रहा है।

खाड़ी देशों में बदलते समीकरण
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में रिश्तों के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। सऊदी अरब और यूएई के बीच यमन को लेकर मतभेद सामने आए हैं। पाकिस्तान हाल के महीनों में सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर नए सुरक्षा गठबंधन की दिशा में बढ़ा है, जबकि यूएई ने भारत के साथ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दी है। इसी बदले रुख का असर इस्लामाबाद एयरपोर्ट डील पर भी दिखता है।

पाकिस्तान पर घटता भरोसा
चार दशक पहले तक यूएई और पाकिस्तान के रिश्ते काफी मजबूत माने जाते थे, लेकिन समय के साथ हालात बदले हैं। पाकिस्तान में सुरक्षा चिंताएं, कमजोर प्रशासन और सरकारी कंपनियों की खराब हालत ने विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। पिछले साल पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) के निजीकरण जैसे कदम भी इसी दबाव को दिखाते हैं। एयरपोर्ट डील का रद्द होना इसी अविश्वास की कड़ी माना जा रहा है।

भारत-यूएई रिश्तों को मिली नई गति
दूसरी ओर, भारत के लिए यह घटनाक्रम सकारात्मक संकेत देता है। राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद की दिल्ली यात्रा के बाद 900 भारतीय कैदियों की रिहाई को मंजूरी दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई राष्ट्रपति के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर अहम सहमति बनी। दोनों देशों ने साफ किया कि अब यह संबंध सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित हैं।