नींद और वजन का गहरा कनेक्शन: सिर्फ...मिनट कम सोने से तेजी से बढ़ सकता है आपका वजन
आज की इस भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और सोशल मीडिया की लत के चलते रात-रात भर जागना युवाओं और कामकाजी लोगों के बीच एक आम बात बन चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह एक छोटी सी लापरवाही आपके शरीर के पूरे वजन को असंतुलित कर सकती है? हाल ही में स्वास्थ्य और विज्ञान जगत से जुड़ी एक बहुत ही चौंकाने वाली स्टडी सामने आई है, जिसने नींद और मोटापे के बीच के समीकरण को लेकर दुनिया भर के विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। इस शोध के अनुसार, यदि आप अपनी रोजाना की तय नींद से केवल 80 मिनट यानी सवा घंटा कम सोते हैं, तो भी आपके शरीर का वजन तेजी से बढ़ना शुरू हो सकता है और आपकी सेहत पर इसके बेहद बुरे परिणाम पड़ सकते हैं। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि वजन केवल ज्यादा खाने या वर्कआउट न करने से बढ़ता है, लेकिन इस नई वैज्ञानिक रिसर्च ने यह साबित कर दिया है कि नींद की कमी भी मोटापे को आमंत्रित करने का एक सबसे बड़ा और अनदेखा कारण है, जिसके बारे में हर किसी को समय रहते सतर्क हो जाना चाहिए।
क्या कहती है वह नई वैज्ञानिक स्टडी जो नींद की कमी और मोटापे के खतरे को उजागर करती है?
प्रसिद्ध चिकित्सा पत्रिकाओं और स्लीप रिसर्च संगठनों द्वारा की गई इस व्यापक स्टडी में विभिन्न आयु वर्ग के सैकड़ों स्वस्थ लोगों की नींद के पैटर्न और उनके खान-पान की आदतों का बारीकी से अध्ययन किया गया। इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों ने अपनी सामान्य नींद के समय में से केवल 80 मिनट की कटौती की, उनके शरीर के हार्मोनल संतुलन में तुरंत नकारात्मक बदलाव देखने को मिले। नींद हमारे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है, और जब हम तय समय से कम सोते हैं तो शरीर का आंतरिक तंत्र तनाव महसूस करने लगता है। इस स्टडी के मुख्य निष्कर्षों में यह बात खुलकर सामने आई कि नींद पूरी न होने की वजह से इंसान के शरीर में ऐसे हॉर्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है जो अनहेल्दी और जंक फूड खाने की लालसा को पैदा करते हैं, जिससे जाने-अनजाने व्यक्ति जरूरत से ज्यादा कैलोरी कंज्यूम कर लेता है और उसका वजन धीरे-धीरे आसमान छूने लगता है।
हॉर्मोन्स का खेल और कम नींद लेने पर क्यों लगने लगती है ज्यादा भूख?
जब कोई इंसान रात के वक्त पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो उसके शरीर में दो बहुत ही महत्वपूर्ण हॉर्मोन्स—घ्रेलिन (Ghrelin) और लेप्टिन (Leptin)—का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाता है। घ्रेलिन वह हार्मोन है जो हमारे शरीर को भूख लगने का अहसास कराता है, जबकि लेप्टिन वह हार्मोन है जो हमारे दिमाग को यह संकेत देता है कि पेट भर चुका है और अब और खाने की जरूरत नहीं है। कम सोने की स्थिति में शरीर में घ्रेलिन यानी भूख बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, जबकि लेप्टिन यानी तृप्ति देने वाले हार्मोन का स्तर काफी नीचे गिर जाता है। यही कारण है कि रात में जागने वाले या कम सोने वाले लोगों को अगले दिन बार-बार कुछ न कुछ अनहेल्दी, मीठा या वसायुक्त खाने की इच्छा होती है, और वे बिना सोचे-समझे अधिक मात्रा में कैलोरी खा लेते हैं। इसके अलावा, नींद की कमी के कारण शरीर की ऊर्जा का स्तर भी कम हो जाता है, जिससे शारीरिक गतिविधियां और मेटाबॉलिक रेट धीमा पड़ जाता है, और खाई गई अतिरिक्त कैलोरी चर्बी के रूप में शरीर में जमा होने लगती है।
वजन घटाने की लाख कोशिशों के बाद भी क्यों नाकाम हो जाते हैं लोग?
आज के दौर में अनगिनत लोग वजन घटाने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाते हैं, स्ट्रिक्ट डाइट प्लान फॉलो करते हैं और महंगे सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करते हैं, फिर भी उन्हें मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाता है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह होती है कि वे अपनी जीवनशैली के सबसे अहम हिस्से यानी 'प्रॉपर स्लीप हाइजीन' को नजरअंदाज कर रहे होते हैं। यदि आप दिनभर जिम में वर्कआउट करके पसीना बहाते हैं लेकिन रात को केवल 4 या 5 घंटे ही सोते हैं, तो आपका शरीर तनावग्रस्त रहता है और 'कोर्टिसोल' हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर पेट और कमर के हिस्से में चर्बी को बढ़ाने का काम करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बार-बार यह समझाते हैं कि वजन को नियंत्रित रखने के लिए केवल जिम या डाइट ही काफी नहीं है, बल्कि कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना उतना ही जरूरी है जितना कि शरीर के लिए ऑक्सीजन का होना, वरना आपकी सारी मेहनत पानी में मिल सकती है।