यहां बच्चा गोरा पैदा होने पर मिलती है दर्दनाक सजा, काली संतान के लिए महिलाएं पीती हैं ये चीज

ये सब केंद्र शासित प्रदेश अंडमान में परंपरा के नाम पर जारवा जनजाति के लोग अपने ही बच्चों को मार रहे हैं।  बता दे कि ये पूरा मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने पुलिस को इस बारे में आँखों देखा हाल बताया। अंडमान पुलिस के सामने मुश्किल यह है कि वह शिकायत पर एक्शन ले या फिर ट्राइब की परंपरा को बनाए रखे।

नयी दिल्ली। भारत का एक ऐसा भी प्रदेश है जहां बच्चा गोरा पैदा होने पर तो उसे ऐसी सजा दी जाती हैं जिसे सुन आपकी रूह कांप जाएगी। दरअसल बच्चे को इसलिए मार दिया जाता है कि क्योंकि वो दूसरे समुदाय का लगता है।
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ये सब केंद्र शासित प्रदेश अंडमान में परंपरा के नाम पर जारवा जनजाति के लोग अपने ही बच्चों को मार रहे हैं।  बता दे कि ये पूरा मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने पुलिस को इस बारे में आँखों देखा हाल बताया। अंडमान पुलिस के सामने मुश्किल यह है कि वह शिकायत पर एक्शन ले या फिर ट्राइब की परंपरा को बनाए रखे।

काला बच्चा पैदा करने के लिए पीते है जानवरों का खून 

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यहां के लोग काला बच्चा पैदा करने के लिए जानवरों का खून पीते हैं। यहां मान्यता है कि अगर गर्भवती महिला को खूल पिलाया जाए तो बच्चे का रंग गहरा हो जाता है और वो पैदा ही काला होता है।

वहीं, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इनकी आबादी करीब 400 है। ये ट्राइब्स अंडमान आइलैंड के नॉर्थ इलाके में रहती है। माना जाता है कि जारवा जनजाति 55 हजार साल से यहां रहती है, लेकिन 1990 में पहली बार बाहरी दुनिया के संपर्क में आई थी।

यहां विदेशी या बाहरी लोगों के आने पर बैन है..

जारवा जनजाति में नवजात को समुदाय से जुड़ी सभी महिलाएं स्तनपान कराती हैं। इसके पीछे जनजाति की मान्यता है कि इससे समुदाय की शुद्धता और पवित्रता बनी रहती है। जारवा ट्राइब्स इलाकों में विदेशी या बाहरी लोगों के आने पर बैन है।

55 हजार साल पुरानी इस जनजाति का बाहरी दुनियां से कोई कनेक्शन नहीं होता हैं। ये अभी भी जंगलों के बीच जंगली मानव की तरह जीवन व्यापन करते हैं। इन्हें तो शायद यह भी नहीं पता हैं कि इनके इलाके के बाहर क्या क्या चीजें चल रही हैं। ये अपनी ही दुनियां में मस्त रहते हैं।

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