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standardized hospital billing format: देश में हर व्यक्ति हमेशा अस्पताल के भारी बिलों और चिकित्सा व्यय के बारे में चिंतित रहता है। हालाँकि, अब यह चिंता दूर होने वाली है। क्योंकि, केंद्र सरकार जल्द ही एक मानक अस्पताल बिल फॉर्म जारी करेगी, जो अस्पतालों, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर लागू होगा।

दवा इलाज की बढ़ती लागत मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए सिरदर्द बन गई है। हालाँकि अब सरकार इस समस्या का जल्द समाधान करने का प्रयास कर रही है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा तैयार मसौदे को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो अस्पताल में इलाज सस्ता और अधिक उपभोक्ता-केंद्रित हो जाएगा। ये प्रक्रिया पिछले वर्ष सभी स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों में बिलिंग प्रक्रियाओं को मानकीकृत करने तथा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी।

बीआईएस स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, रोगी अधिवक्ताओं और अन्य हितधारकों के परामर्श से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा विकसित इस मानक प्रारूप पर काम कर रहा है। जिससे मरीजों को सभी आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति, सेवाओं, सुविधाओं आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

मसौदे में क्या प्रावधान होंगे?

मसौदे में देश भर के अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों द्वारा जारी किए जाने वाले बिलों में अनिवार्य और वैकल्पिक तत्व शामिल किए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अस्पताल बिलिंग के लिए एक standardized format अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य देश भर के सभी अस्पतालों में एक समान उपचार शुल्क सुनिश्चित करना और बिलिंग प्रणाली में गड़बड़ियों को कम करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी अस्पतालों की मनमानी फीस को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी। देश के सभी निजी अस्पतालों और क्लिनिकल सेंटरों द्वारा ली जाने वाली फीस पर कोई सीमा क्यों नहीं तय की गई है? 

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