अगर आपका भी हैं Investment प्लान तो जरुर जानें ये बातें

इंसान जब कही पर भी निवेश करता हैं तो अपनी पूरी पूंजी लगा देता हैं, ज्यादातर लोग इस सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर कहां निवेश करना फायदेमंद है।

इंसान जब कही पर भी निवेश करता हैं तो अपनी पूरी पूंजी लगा देता हैं, ज्यादातर लोग इस सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर कहां निवेश करना फायदेमंद है। इस मसले पर कई बार निवेश सलाहकार की भी राय ली जाती है। निवेश के ऐसा दायित्व है जिसे सोच समझकर करना चाहिए। कहां निवेश करना सही होगा इसे जानने के लिए म्युचुअल फंड के सीईओ (डेट) मर्जबान इरानी व ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के सीईओ पंकज मठपाल से डेट फंड्स के बारे में बात की। तो जानिए इस पर एक्सपर्ट का क्या कहना है।

Investment

डेट फंड क्या है-

डेब्ट फंड में बजे दर फिक्स्ड होता है। जब आप निवेश करते हैं तो आपको पता होता है कि क्या ब्याज मिलेगा। डेब्ट प्रोडक्ट अलग-अलग तरीकों से इशू किए जाते हैं। जिनमें एक शॉर्ट टर्म और दूसरा लॉन्ग टर्म होता है। शॉर्ट टर्म में तीन महीने से लेकर 1 साल तक की अवधि होती है। इसे कंपनी और कॉर्पोरेट दोनों इशू करते हैं। इससे बैंक भी पैसा रेज करते हैं और गवर्नमेंट भी करती है। जो कंपनी रेज करती है उसे कमर्शियल पेपर बोलते हैं।

जब लंबे समय के लिए पैसा चाहिए होता है तो कॉर्पोरेट बांड इशू करता है। सरकार सिक्योरिटीज इशू करती है। ये सब 10 15 वर्षों के लिए होता है। इसको म्यूच्यूअल फंड शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म भी रन करते हैं। म्यूच्यूअल फंड का निवेश दोनों में होता है। इंश्योरेंस कंपनी लंबे समय के लिए चुनती है।

सवाल-

तीन महीने के लिए कौन-सा डेट फंड एफडी से अधिक रिटर्न देता है-

डेट फंड में कभी पैसा लगाएं तो देख लें कि सिक्युरिटीज किस प्रकार कि हैं। ट्रिपल ए और डबल ए वाली सिक्युरिटीज में पैसा लगाना फायदेमंद होगा। डेट फंड में 16 सब कैटेगरी होती हैं। अगर तीन महीने के लिहाज से देखा जाए तो लिक्विड फंड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड बेहतर रहेंगे। इसका कारण यह है कि यहां ब्याज दर बदलने का अधिक फर्क नहीं पड़ेगा। लिक्विड फंड और ओवरनाइट फंड में जोखिम भी बहुत कम है।

क्या डेट फंड में निवेश बैंक एफडी की तरह ही सुरक्षित है-

तीन साल के लिए एफडी लेने पर इसकी तुलना रिटर्न के आधार पर बैंकिंग पीएसयू श्रेणी, गिल्ट फंड या शॉर्ट टर्म बॉन्ड फंड से की जा सकती है। ये सारे फंड तीन से पांच साल की अवधि में बैंक एफडी से ज्यादा रिटर्न देते हैं। एफडी में भी एक बैंक में निवेशक की केवल पांच लाख तक की रकम ही सुरक्षित है। इससे अधिक रकम की एफडी में भी कोई गारंटी नहीं है।

इरानी ने कहा, आप अगर पांच साल की कोई एफडी करते हैं और 6 महीने बाद आपको इमरजेंसी में जरूरत पड़ जाती है, तो बैंक आपसे पेनल्टी लेगा। जबकि, म्युचुअल फंड में ऐसा नहीं है। यहां आप कभी भी अपना पैसा निकाल सकते हैं।

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