Up kiran,Digital Desk : दोस्तों, भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका के हाथों अपने ही घर में टेस्ट इतिहास की सबसे शर्मनाक हार (408 रन) झेलनी पड़ी है। 2-0 से सीरीज गंवाने के बाद से ही भारतीय क्रिकेट में भूचाल आया हुआ है। गुवाहाटी के स्टेडियम में फैंस ने जिस तरह हेड कोच गौतम गंभीर की हूटिंग की, वह नजारा हर किसी ने देखा। हर तरफ बस एक ही शोर है कि "कोच को हटाओ, गंभीर जिम्मेदार हैं।"
लेकिन इस हंगामे के बीच टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन ने जो कहा है, उसे हर क्रिकेट फैन को ठंडे दिमाग से सुनना चाहिए। अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर साफ-साफ कहा कि हर बार हार का ठीकरा कोच के सिर फोड़ना सही नहीं है।
"कोच बल्ला लेकर खेलने नहीं जाएगा"
अश्विन ने बेहद साधारण लेकिन कड़वे शब्दों में हकीकत बयां की। उनका कहना है कि कोच का काम सिर्फ रणनीति बनाना और खिलाड़ियों से बात करना है। उन्होंने कहा, "सच तो यह है कि कोच खुद बल्ला उठाकर मैदान में खेलने नहीं जा सकता। वो सिर्फ अपना काम कर सकता है, रास्ता दिखा सकता है, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन तो खिलाड़ियों को ही करना होगा।"
"आटा होगा, तभी रोटी बनेगी"
अपनी बात को समझाने के लिए अश्विन ने एक बेहतरीन देसी उदाहरण दिया। उन्होंने तमिल कहावत का जिक्र करते हुए कहा- "अगर आपके पास आटा है, तभी आप रोटी बना सकते हैं। अगर आटा ही नहीं होगा, तो रोटी कैसे बनेगी?"
उनका इशारा साफ़ था कि अगर खिलाड़ी (आटा) ही अपना हुनर (स्किल्स) नहीं दिखाएंगे, तो कोच (रोटी बनाने वाला) अच्छी टीम कैसे बनाएगा? सिर्फ फैसलों पर सवाल उठाना आसान है, लेकिन उसे मैदान पर लागू करना खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है।
"गौतम मेरा रिश्तेदार नहीं है"
गौतम गंभीर पर हो रहे पर्सनल अटैक से अश्विन काफी नाखुश दिखे। उन्होंने बेबाकी से कहा, "देखो भाई, गौतम मेरा कोई रिश्तेदार नहीं लगता। मैं किसी का पक्ष नहीं ले रहा हूँ। गलतियां होती हैं, मुझसे भी, उनसे भी। लेकिन जब हम हारते हैं, तो किसी एक इंसान को पकड़कर उसे विलेन बना देना और उस पर निजी हमले करना गलत है। यह मैनेजमेंट इतना आसान नहीं होता।"
अश्विन ने माना कि टीम में अभी असुरक्षा का माहौल है और काफी रोटेशन हो रहा है, लेकिन अंत में 'परफॉर्म' करना तो खिलाड़ी के हाथ में ही है।
मैसेज साफ़ है: सिर्फ गालियां देने से नहीं चलेगा काम
अश्विन ने फैंस और आलोचकों को समझाने की कोशिश की है कि कोच बदलना या उसे निकालना बहुत आसान लगता है, लेकिन यह समस्या का हल नहीं है। टीम हारी है, तो इसका दर्द कोच को भी है। अब वक्त बिना सोचे-समझे रिएक्शन देने का नहीं, बल्कि खुद के अंदर झांकने का है कि खिलाड़ियों से चूक कहाँ हुई।
अश्विन का यह बयान बताता है कि टीम के सीनियर खिलाड़ी अभी भी कोच के विजन पर भरोसा करते हैं और जिम्मेदारी खुद लेने को तैयार हैं।

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