ट्रेन से चादर-तौलिया चुराने वालों की खैर नहीं! रेलवे ला रहा हाईटेक RFID सिस्टम, बैग में रखते ही बजेगा जोरदार हूटर

ट्रेन से चादर-तौलिया चुराने वालों की खैर नहीं! रेलवे ला रहा हाईटेक RFID सिस्टम, बैग में रखते ही बजेगा जोरदार हूटर

भारतीय रेलवे (Indian Railways) में सफर के दौरान एसी कोच (AC Coaches) में मिलने वाले चादर, तकिए, कंबल और तौलिये को कुछ यात्री अनजाने में या जानबूझकर अपने साथ घर ले जाते हैं। यात्रियों की इस 'चोरी की आदत' से रेलवे को हर साल करोड़ों रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ता है। अकेले उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के डिवीजनों में ही सालाना लाखों तौलिये और चादर गायब हो जाते हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने और सरकारी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए अब रेलवे प्रशासन एक बेहद आधुनिक और हाईटेक सुरक्षा सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इस नए सिस्टम के आने के बाद अगर कोई यात्री ट्रेन का बेडरोल अपने बैग में रखकर स्टेशन से बाहर निकलने की कोशिश करेगा, तो वहां लगा हूटर तुरंत बज उठेगा।

क्या है यह हाईटेक RFID टेक्नोलॉजी और कैसे करेगी काम

रेलवे इस चोरी को रोकने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी RFID (Radio Frequency Identification) तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। इस सिस्टम के तहत ट्रेन के हर चादर, तौलिये और कंबल के भीतर एक बेहद छोटी, पतली और वॉशेबल RFID डिजिटल चिप (Microchip) को सिल दिया जाएगा। यह चिप इतनी बारीक होगी कि कपड़ों को धोने या प्रेस करने पर भी खराब नहीं होगी। इसके साथ ही रेलवे स्टेशनों के एग्जिट गेट (निकासी द्वारों) और बोगियों के दरवाजों पर विशेष आरएफआईडी सेंसर और स्कैनर लगाए जाएंगे, जो इन चिप्स को दूर से ही डिटेक्ट करने की क्षमता रखते हैं।

बैग में सामान छिपाते ही बज उठेगा अलार्म, पकड़े जाएंगे चोर

जैसे ही कोई यात्री इन कीमती कपड़ों को अपने निजी बैग या सूटकेस के अंदर छिपाकर ट्रेन से उतरने या स्टेशन परिसर से बाहर भागने की कोशिश करेगा, एग्जिट गेट पर लगे डिजिटल स्कैनर तुरंत उस छिपी हुई चिप को रीड कर लेंगे। स्कैनर के एक्टिवेट होते ही स्टेशन पर लगा एक तेज आवाज वाला हूटर (Alarm Hooter) बजने लगेगा। हूटर बजते ही वहां तैनात आरपीएफ (RPF) और टीटीई (TTE) की टीम तुरंत सतर्क हो जाएगी और उस यात्री को रंगे हाथों पकड़ लिया जाएगा। इस तकनीक के लागू होने से न सिर्फ चोरियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी, बल्कि रेलवे के पास बेडरोल के स्टॉक का सटीक डिजिटल डेटा भी मौजूद रहेगा।

ट्रायल रन सफल, जल्द ही सभी प्रीमियम ट्रेनों में लागू होगा सिस्टम

रेलवे बोर्ड के सूत्रों के मुताबिक, इस हाईटेक सिस्टम का शुरुआती ट्रायल कुछ चुनिंदा प्रीमियम ट्रेनों (जैसे राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत एक्सप्रेस) में किया गया है, जिसके परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं। लखनऊ, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े और प्रमुख रेल डिवीजनों में इस तकनीक को सबसे पहले ग्राउंड लेवल पर उतारने की योजना बनाई जा रही है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस डिजिटल सुरक्षा कवच के आने के बाद ट्रेनों में चोरी की घटनाओं में 99% तक की कमी आएगी और यात्रियों को भी हमेशा साफ और पूरे बेडरोल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

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