अफगानिस्तान को 101 रनों से धोकर फाइनल की दहलीज पर पहुंचे भारतीय शेर, तीन बल्लेबाजों ने जड़े अर्धशतक

अफगानिस्तान को 101 रनों से धोकर फाइनल की दहलीज पर पहुंचे भारतीय शेर, तीन बल्लेबाजों ने जड़े अर्धशतक

श्रीलंका की धरती पर खेली जा रही ट्राई-नेशन वनडे सीरीज से भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बेहद बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। बुधवार, 17 जून 2026 को दांबुला के मैदान पर खेले गए एक बेहद रोमांचक और 'करो या मरो' (Do or Die) वाले लीग मुकाबले में कप्तान तिलक वर्मा की अगुवाई वाली इंडिया-ए (India A) ने शानदार वापसी करते हुए अफगानिस्तान-ए (Afghanistan A) को 101 रनों के विशाल अंतर से धूल चटा दी है। इस धमाकेदार जीत के साथ ही भारतीय युवा ब्रिगेड ने न सिर्फ टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को मजबूती से जिंदा रखा है, बल्कि पिछले मैच में डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम के तहत अफगानिस्तान से मिली हार का हिसाब भी चुकता कर लिया है।

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने प्रियांश आर्या, कुमार कुशाग्र और खुद कप्तान तिलक वर्मा की बेहतरीन अर्धशतकीय पारियों की बदौलत निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट खोकर 319 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। जवाब में 320 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान-ए की पूरी टीम भारतीय गेंदबाजों की धारदार गेंदबाजी के आगे महज 36.5 ओवरों में 218 रनों पर ही ढेर हो गई।

प्रियांश, कुशाग्र और तिलक का त्रिशूल; भारतीय बल्लेबाजों ने अफगानिस्तान के गेंदबाजों को रिमांड पर लिया

इस महत्वपूर्ण मैच में अफगानिस्तान के कप्तान इमरान मीर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, लेकिन भारतीय ओपनर्स ने उनके इस फैसले को पूरी तरह गलत साबित कर दिया। युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी और प्रियांश आर्या ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए पहले 6 ओवरों में ही 53 रन कूट दिए। वैभव हालांकि 28 गेंदों में 38 रन (4 चौके, 3 छक्के) बनाकर आउट हो गए, लेकिन दूसरे छोर पर प्रियांश आर्या ने रनों की बारिश जारी रखी। प्रियांश ने महज 34 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और आउट होने से पहले 42 गेंदों में 58 रनों की आतिशी पारी खेली। इसके बाद उप-कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने भी 30 रनों का उपयोगी योगदान दिया।

मध्यक्रम में विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार कुशाग्र और कप्तान तिलक वर्मा ने मोर्चा संभाला। कुशाग्र ने सूझबूझ से बल्लेबाजी करते हुए 67 गेंदों में 58 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि कप्तान तिलक वर्मा ने मोर्चे से अगुवाई करते हुए 75 गेंदों में 59 रनों की कप्तानी पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। अंत में विप्रज निगम की 20 गेंदों में खेली गई 30 रनों की कैमियो पारी की बदौलत भारत ने स्कोरबोर्ड पर 319 रन टांग दिए।

निशांत सिंधु की फिरकी का जादू, ताश के पत्तों की तरह बिखरी अफगानी टीम

320 रनों के पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान-ए की शुरुआत बेहद खराब रही। हालांकि, मध्यक्रम में बहिर शाह ने 57 रन और फैसल निशोजादा ने 46 रनों की जुझारू पारियां खेलकर अपनी टीम को मैच में बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन भारतीय स्पिनर निशांत सिंधु के इरादे कुछ और ही थे। निशांत सिंधु ने अपनी जादुई फिरकी से अफगानिस्तान के बल्लेबाजी क्रम की कमर तोड़ दी। सिंधु ने घातक गेंदबाजी करते हुए सर्वाधिक 4 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए।

निशांत सिंधु के अलावा तेज गेंदबाज यश ठाकुर ने भी शानदार स्पैल डालते हुए 2 विकेट अपने नाम किए, जबकि विप्रज निगम, सुयांश शेडगे, अंशुल कंबोज और अनुकूल रॉय को 1-1 सफलता हाथ लगी। भारतीय गेंदबाजों की इस कसी हुई और आक्रामक लाइन-लेंथ के सामने अफगानिस्तान का कोई भी पुच्छल्ला बल्लेबाज टिक नहीं सका और उनकी पूरी टीम 218 रनों पर ऑलआउट हो गई।

तिलक ब्रिगेड ने फाइनल की राह की आसान, अब खिताबी मुकाबले पर नजरें

इस सीरीज में इंडिया-ए का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा था। पहले मैच में श्रीलंका को हराने के बाद टीम इंडिया को अफगानिस्तान से हार झेलनी पड़ी थी, और उसके बाद पिछले मैच में श्रीलंका ने एक बेहद रोमांचक मुकाबले में भारत को सुपर ओवर में मात दी थी। ऐसे में फाइनल की रेस में बने रहने के लिए भारत के लिए यह मुकाबला हर हाल में जीतना जरूरी था। अगर भारतीय टीम यह मैच हार जाती तो टूर्नामेंट से सीधे बाहर हो जाती और अफगानिस्तान सीधे फाइनल में पहुंच जाता। लेकिन इस ऐतिहासिक 101 रनों की जीत के साथ भारतीय टीम ने फाइनल के टिकट पर अपना दावा बेहद मजबूत कर लिया है।

 

 

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