अतीक अहमद की हत्या के 3 साल बाद भी बेनामी संपत्तियों पर एक्शन जारी: जांच के लिए बनी हाई-प्रोफाइल SIT
प्रयागराज : माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की 15 अप्रैल 2023 को हुई सनसनीखेज हत्या के तीन साल बाद भी प्रयागराज में उसके अवैध साम्राज्य और आर्थिक नेटवर्क के खिलाफ पुलिस प्रशासन की कार्रवाई थमने का नाम नहीं ले रही है।
अतीक-अशराफ की मौत और उनकी पत्नियों (शाइस्ता परवीन और जैनब फातिमा) के लगातार फरार रहने के बीच, माफिया गैंग की अरबों रुपये की बेनामी संपत्तियों (Benami Properties) का पूरा हिसाब-किताब लगाने के लिए प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।
इस हाई-प्रोफाइल SIT में शामिल हैं ये 5 बड़े अधिकारी
अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. अजय पाल के निर्देश पर गठित इस विशेष जांच टीम में प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के एक्सपर्ट अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि संपत्तियों की विधिक जांच में कोई कमी न रहे:
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मनीष कुमार शांडिल्य (पुलिस उपायुक्त नगर)
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सत्यम मिश्र (एडीएम सिटी)
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अरविंद राय (अपर नगर आयुक्त)
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राकेश चंद्रा (एआईजी स्टाम्प)
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विनीत कुमार सिंह (सचिव, प्रयागराज विकास प्राधिकरण - PDA)
एसआईटी का वर्क-प्रोटोकॉल: आदेश के अनुसार, एसआईटी को तीन दिन के भीतर अपनी जमीनी और दस्तावेजी जांच शुरू करनी होगी। पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करने के लिए टीम को हर सोमवार को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट (Weekly Progress Report) सीधे अपर पुलिस आयुक्त को सौंपनी होगी। अवैध रूप से अर्जित पाई जाने वाली सभी संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क (जब्त) किया जाएगा।
'मदन लाल भारतीया' के नाम पर खरीदी गईं धूमनगंज की जमीनें
यह ताजा और बड़ी कार्रवाई अधिवक्ता केपी श्रीवास्तव की एक विस्तृत शिकायत के बाद शुरू हुई है। शिकायत में पुख्ता दस्तावेजों के साथ आरोप लगाया गया है कि माफिया अतीक अहमद और उसके परिवार ने अपराध की कमाई को खपाने के लिए अपने बेहद करीबी और चकिया के रहने वाले मदन लाल भारतीया के नाम पर धूमनगंज क्षेत्र में कई कीमती बेनामी संपत्तियां और जमीनों की रजिस्ट्रियां करवाई थीं।
मौत के 3 साल बाद भी 'अतीक' के नाम की शिकायतों की भरमार
प्रयागराज के प्रशासनिक अधिकारी इस बात को लेकर हैरान और त्रस्त हैं कि इस माफिया के अपराध की जड़ें कितनी गहरी थीं कि मौत के इतने समय बाद भी जमीनों पर उसके अवैध कब्जों के निशान मिट नहीं रहे हैं।
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100 में से 50 शिकायतें: सदर तहसील की जनसुनवाई में रोजाना आने वाली लगभग 100 शिकायतों में से 40 से 50 मामले सीधे तौर पर जमीन और संपत्ति कब्जे के होते हैं, जिनमें अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ या उनके गुर्गों का नाम शामिल होता है।
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सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र: विशेषकर करेली, करैलाबाग, कटुहला, गौसपुर और रसूलपुर जैसे इलाकों की जमीनों पर माफिया गैंग ने सबसे ज्यादा कब्जे किए थे।
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अफसरों का रुख: एसडीएम सदर अभिषेक कुमार सिंह का कहना है कि वर्तमान में शिकायतों में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन कुछ समय पहले तक अतीक-अशरफ के नाम की शिकायतों की बाढ़ आई हुई थी।
डर खत्म होने पर अब खुलकर सामने आ रहे पीड़ित
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, माफिया की मौत के बाद अब आम जनता और किसानों के मन से अतीक गैंग का खौफ धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, जिससे लोग अब अपनी शिकायतों के साथ खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में गौसपुर कटहुला में पांच बीघा जमीन पर माफिया के गुर्गों द्वारा जबरन किए गए कब्जे की बात सच साबित हुई थी। ऐसे सभी पीड़ितों की सूची बनाई जा रही है ताकि उन्हें उनकी जमीनें वापस दिलाई जा सकें।
कहाँ गायब हैं शाइस्ता और जैनब?
उमेश पाल हत्याकांड (2023) के बाद से ही अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन और अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा लगातार फरार हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए दोनों लगातार अपने ठिकाने, पहनावे और रूप-रंग को बदल रही हैं, जिसके कारण अब तक उनका कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस नई एसआईटी जांच से उनके वित्तीय मददगारों का भी पर्दाफाश होगा।