राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT का बड़ा एक्शन: सवा सौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी, कई नए रसूखदार चेहरे रडार पर

राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT का बड़ा एक्शन: सवा सौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी, कई नए रसूखदार चेहरे रडार पर

लखनऊ : अयोध्या के ऐतिहासिक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे (दान) की राशि में कथित हेरफेर और अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार (23 जून 2026) को लखनऊ के मंडलायुक्त और एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत ने टीम के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर अपर मुख्य सचिव (ACS) गृह संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है।

करीब सवा सौ (125) पन्नों की इस विस्तृत प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर परिसर की आंतरिक सुरक्षा, नोटों की गिनती की व्यवस्था और दान प्रबंधन को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। साथ ही, व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कुछ बेहद कड़े और महत्वपूर्ण सुझाव (सिफारिशें) भी सरकार को भेजे गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था में हर स्तर पर मिलीं गंभीर खामियां

एसआईटी ने अयोध्या में लगातार सात दिनों तक जमीनी स्तर पर दस्तावेजों की पड़ताल और आरोपियों से पूछताछ करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में मुख्य रूप से इन बिंदुओं को रेखांकित किया गया है:

  • सुरक्षा मानकों की अनदेखी: चढ़ावे के नोटों की गिनती और श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई बहुमूल्य धातुओं (सोना, चांदी आदि) को लॉकर या भंडारण (Storage) में रखने के दौरान जिस तरह की पुख्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए थी, उसका पूरी तरह अभाव पाया गया।

  • प्रबंधन की लापरवाही: नोटों की गिनती के दौरान तय किए गए नियमों और अनुबंधों (Contracts) का कड़ाई से पालन नहीं किया गया, जिससे हेरफेर की गुंजाइश बनी।

चढ़ावे से शुरू हुई जांच, अब निर्माण कमीशन और धातुओं तक पहुंची

शुरुआत में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर इस तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, तब जांच का दायरा केवल चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर तक सीमित था। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, आरोपों की लिस्ट लंबी होती चली गई:

  1. धातुओं के भंडारण पर शक: श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई सोने-चांदी की ईंटों और अन्य कीमती धातुओं के सही इस्तेमाल और उनके सुरक्षित रखरखाव पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

  2. निर्माण में कमीशन के आरोप: मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट्स में कमीशनखोरी के गंभीर आरोप भी अब इस जांच के दायरे में शामिल हो चुके हैं।

अधिकारियों का मानना है कि इन सभी गंभीर विषयों की गहराई तक जाने के लिए 15 दिन की निर्धारित अवधि पर्याप्त नहीं है, इसलिए यह केवल पहली स्टेज की रिपोर्ट है।

ट्रस्ट से बाहर के 'रसूखदार' और नए चेहरे रडार पर

प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब अयोध्या और लखनऊ के गलियारों में कुछ ऐसे नए और प्रभावशाली नामों की चर्चा तेज हो गई है, जो सीधे तौर पर राम मंदिर के कर्मचारी या पदाधिकारी नहीं हैं।

सूत्रों के अनुसार, ये शहर के कुछ ऐसे रसूखदार लोग हैं जिनका जुड़ाव ट्रस्ट के बेहद प्रभावशाली पदाधिकारियों से रहा है और उन्होंने इसी रसूख का फायदा उठाकर अपने चहेतों को मंदिर के संवेदनशील कार्यों (जैसे नोटों की गिनती) में आउटसोर्सिंग के जरिए तैनात करवाया था। एसआईटी अब दूसरे चरण (सेकंड फेज) की जांच में इन बाहरी रसूखदारों को समन जारी कर सीधे पूछताछ की तैयारी में है।

जांच अभी जारी है:

रिपोर्ट सौंपने के बाद एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया में बस इतना कहा कि "जांच की विधिक कार्यवाही अभी प्रचलित (जारी) है।" माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस रिपोर्ट की ब्रीफिंग मिलने के बाद, एसआईटी के आला अधिकारी दूसरे स्तर की गहन जांच के लिए एक बार फिर 'रामधाम' (अयोध्या) का रुख करेंगे।

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