परीक्षा के दिन नेविगेशन ने अभ्यर्थियों को पहुंचाया गलत लोकेशन; एंट्री न मिलने से छूटा भविष्य का बड़ा पेपर
डिजिटल इंडिया के इस आधुनिक दौर में जहां हम छोटी से छोटी दुकान से लेकर बड़े से बड़े पते को खोजने के लिए पूरी तरह गूगल मैप (Google Maps) पर निर्भर हो चुके हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के औरैया से एक बेहद हैरान और सतर्क करने वाली खबर सामने आई है। यहां आयोजित हुई एक अत्यंत महत्वपूर्ण सरकारी शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान दो अभ्यर्थियों को गूगल मैप पर आंख मूंदकर भरोसा करना बेहद भारी पड़ गया। नेविगेशन की एक छोटी सी तकनीकी चूक और गलत एड्रेस लोकेशन दिखाने की वजह से दोनों परीक्षार्थी समय पर अपने सही एग्जाम सेंटर नहीं पहुंच सके। जब तक वे अपनी गलती सुधार पाते, तब तक परीक्षा केंद्र का मुख्य गेट पूरी तरह बंद हो चुका था। लाइव हिन्दुस्तान के विशेष जिला संवाददाता पवन कुमार शर्मा की औरैया से इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि कैसे डिजिटल तकनीक की एक चूक ने युवाओं की सालों की कड़ी मेहनत पर पूरी तरह पानी फेर दिया।
अजीतमल की जगह ककोर ले गया गूगल मैप, कानपुर से आए पूजा और संजय की मेहनत पर फिरा पानी
यह पूरी दुखद घटना रविवार को औरैया जिले के अजीतमल कस्बे में स्थित 'श्री जनता इंटर कॉलेज' परीक्षा केंद्र पर सामने आई, जहां उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राजकीय प्रवक्ता (UPPSC GIC Lecturer Exam) की मुख्य परीक्षा चल रही थी। कानपुर से परीक्षा देने आए दो अभ्यर्थी पूजा शुक्ला और संजय कुमार सुबह-सुबह अपने तय समय पर औरैया पहुंचे थे। अनजान शहर होने के कारण उन्होंने अपने मोबाइल में गूगल मैप चालू किया और उस पर 'जनता इंटर कॉलेज' सर्च किया। गूगल मैप के एल्गोरिदम ने उन्हें अजीतमल स्थित परीक्षा केंद्र दिखाने के बजाय जिला मुख्यालय ककोर के पास स्थित एक अन्य विद्यालय की लोकेशन दिखा दी। नेविगेशन पर पूरा भरोसा करते हुए दोनों अभ्यर्थी बाइक से ककोर पहुंच गए, जो कि उनके असली परीक्षा केंद्र से कई किलोमीटर दूर था।
गेट पर हाथ जोड़ते रहे अभ्यर्थी पर प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर एंट्री देने से किया साफ मना
ककोर पहुंचने पर जब पूजा और संजय ने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें पता चला कि उनका असली परीक्षा केंद्र ककोर नहीं, बल्कि वहां से काफी दूर श्री जनता इंटर कॉलेज अजीतमल है। दोनों अभ्यर्थी बिना एक पल गंवाए घबराहट में अजीतमल के लिए तेजी से रवाना हुए। उन्होंने रास्ते में तेजी से दूरी तय की, लेकिन जब वे हांफते हुए अजीतमल केंद्र के मुख्य द्वार पर पहुंचे, तब तक एंट्री का निर्धारित समय पूरी तरह समाप्त हो चुका था। परीक्षा केंद्र के गेट बंद हो चुके थे। दोनों अभ्यर्थियों ने अंदर जाने के लिए केंद्र प्रशासन के सामने काफी गुहार लगाई और अपनी तकनीकी परेशानी बताई। हालांकि, परीक्षा केंद्र प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग एवं बोर्ड के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, निर्धारित समय के बाद किसी भी परिस्थिति में गेट खोलने की अनुमति नहीं है। नियमों की बाध्यता के कारण दोनों को प्रवेश नहीं मिला और उनका जीवन बदलने वाला पेपर छूट गया।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी भी नीट परीक्षार्थियों को कर चुकी है आगाह, एक दिन पहले सेंटर वेरिफिकेशन है बेहद जरूरी
इस घटना के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद अन्य वरिष्ठ अभ्यर्थियों और शिक्षाविदों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को एक बहुत बड़ी और व्यावहारिक सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कभी भी किसी भी बड़ी परीक्षा के मुख्य दिन सीधे गूगल मैप के भरोसे घर से नहीं निकलना चाहिए। अभ्यर्थियों को हमेशा परीक्षा से एक या दो दिन पहले ही अपने परीक्षा केंद्र के मार्ग, यातायात के साधनों और सटीक भौगोलिक लोकेशन की भौतिक रूप से पुष्टि (Physical Verification) कर लेनी चाहिए। आपको बता दें कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) भी पूर्व में नीट (NEET) और सीयूईटी (CUET) के परीक्षार्थियों के लिए आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर चुकी है कि वे पूरी तरह से ऑनलाइन मैप्स पर निर्भर न रहें और प्रवेश पत्र पर दिए गए लैंडमार्क के अनुसार ही अपने गंतव्य तक पहुंचें।
मुजफ्फरनगर में भी गूगल मैप के फेर में फंसे थे यूपी पुलिस भर्ती के चार छात्र, शामली के गांव में भटकाया था रास्ता
गूगल मैप द्वारा अभ्यर्थियों को गुमराह करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा (UP Police Constable Exam) के दौरान भी ऐसी ही एक बड़ी लापरवाही सामने आ चुकी है। बीती 10 जून को मुजफ्फरनगर के दीपचंद ग्रैन चैम्बर इंटर कॉलेज में परीक्षा देने के लिए गाजियाबाद से चार दोस्त धर्मेंद्र चौधरी, अरुण मलिक, विशाल और नकुल बाइक से निकले थे। उन्होंने अपने फोन में मुजफ्फरनगर के परीक्षा केंद्र की लोकेशन डाली, लेकिन गूगल मैप की तकनीकी गड़बड़ी के कारण नेविगेशन उन्हें मुजफ्फरनगर ले जाने के बजाय पड़ोसी जिले शामली के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में ले गया। जब तक उन चारों युवाओं को रास्ते की गड़बड़ी का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परीक्षा छूटने के बाद परेशान होकर इन चारों अभ्यर्थियों ने मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी (DM) उमेश कुमार मिश्रा और एसपी सिटी अमृत जैन से मिलकर अपनी गुहार लगाई थी, लेकिन नियमों के कारण उन्हें भी कोई राहत नहीं मिल सकी थी।