चारधाम यात्रा में अब तक 161 श्रद्धालुओं की मौत से हड़कंप, 31 लाख से ज्यादा पहुंचे यात्री, इस एक धाम में दर्ज हुईं सबसे ज्यादा दुखद घटनाएं
उत्तराखंड की प्रसिद्ध और पवित्र चारधाम यात्रा इस समय अपने पूरे शबाब पर है। देश-दुनिया से आस्था का सैलाब देवभूमि की ओर उमड़ रहा है और अब तक रिकॉर्ड तोड़ संख्या में श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। लेकिन इसी बीच राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की तरफ से एक बेहद डराने वाली और चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 19 अप्रैल से शुरू हुई इस साल की यात्रा सीजन में अब तक कुल 161 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इस डरावनी रिपोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अधिकांश श्रद्धालुओं की जान अचानक तबीयत बिगड़ने और दिल का दौरा पड़ने जैसी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के कारण गई है।
31 लाख श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड आंकड़ा पार, केदारनाथ और बदरीनाथ में सबसे भारी भीड़
एक तरफ जहां मौतों का आंकड़ा डरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बाबा के भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 31 लाख से अधिक श्रद्धालु उत्तराखंड के पावन धामों में शीश नवा चुके हैं। इस सीजन में भी हमेशा की तरह श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा संख्या बाबा केदारनाथ के धाम में दर्ज की गई है। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से अब तक रिकॉर्ड 11,05,676 लोग केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर भगवान बदरीनाथ का धाम है, जहां अब तक 9,08,619 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।
गंगोत्री और यमुनोत्री में भी उमड़ा आस्था का जनसैलाब, गौमुख ट्रैक पर पहुंचे ट्रेकर्स
पहाड़ों के दुर्गम रास्तों के बावजूद अन्य धामों में भी भक्तों का तांता लगा हुआ है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, गंगोत्री धाम में अब तक 5,28,406 और यमुनोत्री धाम में 5,07,421 श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अलावा सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब में भी अब तक 55,411 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं। वहीं, रोमांच के शौकीन लोगों की बात करें तो गंगोत्री क्षेत्र के बेहद कठिन और खूबसूरत माने जाने वाले गौमुख ट्रैक पर भी 4,697 ट्रैकर्स पहुंच चुके हैं।
आखिर क्यों जा रही श्रद्धालुओं की जान? यमुनोत्री धाम बना सबसे बड़ा 'डेंजर जोन'
प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों का सबसे दुखद पहलू यह है कि 161 मौतों में से 152 श्रद्धालुओं की जान सीधे तौर पर खराब तबीयत और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की वजह से गई है। केवल आठ लोगों की मौत अन्य हादसों में हुई है और एक व्यक्ति की स्वाभाविक मृत्यु दर्ज की गई है। अगर धाम के हिसाब से बात करें, तो इस बार यमुनोत्री धाम श्रद्धालुओं के लिए सबसे खतरनाक साबित हो रहा है। अकेले यमुनोत्री धाम में अब तक सबसे ज्यादा 78 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। इसके बाद केदारनाथ धाम में 47, बदरीनाथ धाम में 20 और गंगोत्री धाम में 16 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है।
सड़कों पर रेंग रही गाड़ियां, प्रशासन ने जारी की सख्त हेल्थ एडवाइजरी
यात्रा मार्गों पर वाहनों का दबाव इस कदर है कि सड़कें छोटी पड़ने लगी हैं। केवल एक दिन शनिवार को ही 61,262 श्रद्धालु चारधाम पहुंचे और उसी दिन 5,511 वाहन यात्रा मार्गों पर दर्ज किए गए। यात्रा शुरू होने से अब तक कुल 2,89,918 छोटे-बड़े वाहन इन पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल कर चुके हैं। लगातार बढ़ती मौतों को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए बेहद सख्त हेल्थ एडवाइजरी (स्वास्थ्य सलाह) जारी की है। प्रशासन ने विशेष रूप से बुजुर्गों, हृदय रोगियों (Heart Patients), हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी पूरी मेडिकल जांच जरूर करवाएं। ऊंचाई वाले इलाकों में अचानक होने वाली ऑक्सीजन की कमी और बेहद कठिन चढ़ाई को देखते हुए यात्रियों को पूरी तैयारी और डॉक्टरों की सलाह के बाद ही आगे बढ़ने की चेतावनी दी जा रही है।